‘अगर ईरान तेल नहीं बेचेगा तो कोई और भी नहीं बेच पाएगा’… अमेरिका को तेहरान की खुली चेतावनी, होर्मुज स्ट्रेट पर बढ़ा तनाव

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तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच तेहरान ने एक बार फिर कड़ा रुख अपनाया है। ईरान की संसद के स्पीकर और मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि ईरान को अपना कच्चा तेल बेचने की अनुमति नहीं मिली तो खाड़ी क्षेत्र का कोई भी देश तेल नहीं बेच पाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा तभी संभव है जब इस क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी न हो।

मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि मौजूदा हालात अब “सब कुछ या कुछ नहीं” की स्थिति में पहुंच चुके हैं। उन्होंने कहा कि जिस क्षेत्र में ईरान तेल नहीं बेच पाएगा, वहां किसी अन्य देश को भी तेल बेचने की अनुमति नहीं होगी। उनका कहना था कि यदि ईरान की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होती तो क्षेत्र का कोई भी महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा सुरक्षित नहीं रहेगा।

‘युद्ध से पहले जैसे हालात नहीं लौटेंगे’

गालिबाफ ने कहा कि ईरान पहले भी स्पष्ट कर चुका है कि होर्मुज स्ट्रेट की स्थिति अब युद्ध से पहले जैसी नहीं होगी। उन्होंने दोहराया कि इस रणनीतिक जलमार्ग की सुरक्षा अमेरिकी सेनाओं की अनुपस्थिति में ही संभव है।

ईरान के विदेश मंत्री ने भी दिया कड़ा संदेश

ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने भी अमेरिका को सख्त संदेश देते हुए कहा कि उनका देश “जैसे को तैसा” की रक्षा नीति पर अमल करेगा। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि ईरान के खिलाफ किसी भी प्रकार की आक्रामक कार्रवाई का निर्णायक और सशक्त जवाब दिया जाएगा।

ट्रंप की चेतावनी के बाद बढ़ा तनाव

ईरान की यह प्रतिक्रिया अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान के बाद सामने आई है। ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि यदि ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में किसी जहाज पर मिसाइल, रॉकेट, ड्रोन या किसी अन्य हथियार से हमला किया तो अमेरिका जवाबी कार्रवाई में हर बार ईरान के किसी पुल या पावर प्लांट को निशाना बनाएगा।

उन्होंने अपने सोशल मीडिया मंच ट्रुथ सोशल पर कहा था कि ऐसी किसी भी घटना के बाद अमेरिकी सेना ईरान के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर कार्रवाई करेगी, जिसमें राजधानी तेहरान के पास या उसके भीतर स्थित पुल और पावर प्लांट भी शामिल हो सकते हैं।

होर्मुज स्ट्रेट क्यों है अहम?

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक माना जाता है। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में इस क्षेत्र में बढ़ता तनाव अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर व्यापक असर डाल सकता है।

 

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