सावन में शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने से पहले जान लें ये 4 अहम नियम, तभी पूर्ण मानी जाती है भगवान शिव की पूजा

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नई दिल्ली: सावन का पवित्र महीना 30 जुलाई से शुरू हो चुका है और पहला सावन सोमवार 3 अगस्त को पड़ रहा है। इस दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक और रुद्राभिषेक कर शिवलिंग पर बेलपत्र अर्पित करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बेलपत्र भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है, लेकिन इसे अर्पित करने के भी कुछ विशेष नियम बताए गए हैं। इन नियमों का पालन करने से पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होने की मान्यता है।

सोमवार और चतुर्थी को बेलपत्र न तोड़ें

धार्मिक मान्यता के अनुसार, सोमवार और चतुर्थी तिथि के दिन बेलपत्र नहीं तोड़ना चाहिए। यदि सावन सोमवार की पूजा के लिए बेलपत्र चाहिए, तो उन्हें एक दिन पहले ही तोड़कर सुरक्षित रख लेना उचित माना जाता है।

खंडित बेलपत्र न करें अर्पित

शिवलिंग पर चढ़ाया जाने वाला बेलपत्र पूरी तरह साबुत होना चाहिए। फटा, कटा या टूटा हुआ बेलपत्र अर्पित करना शुभ नहीं माना जाता। साथ ही पारंपरिक मान्यता के अनुसार तीन पत्तियों वाला बेलपत्र सबसे उत्तम माना जाता है।

बेलपत्र चढ़ाने का सही तरीका

शिवलिंग पर बेलपत्र अर्पित करते समय इस बात का विशेष ध्यान रखें कि उसका चिकना भाग शिवलिंग को स्पर्श करे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस विधि से बेलपत्र अर्पित करने पर भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

विषम संख्या में ही चढ़ाएं बेलपत्र

पूजा के दौरान बेलपत्र हमेशा विषम संख्या में अर्पित करने की परंपरा है। सामान्यतः 3, 5, 7 या 11 बेलपत्र चढ़ाना शुभ माना जाता है। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और पूजा-विधि के अनुसार इन संख्याओं में बेलपत्र अर्पित कर सकते हैं।

सावन में बेलपत्र का धार्मिक महत्व

हिंदू धार्मिक मान्यताओं में बेलपत्र को भगवान शिव की आराधना का अभिन्न अंग माना गया है। कहा जाता है कि विधि-विधान से बेलपत्र अर्पित करने पर शिव कृपा प्राप्त होती है और भक्त की मनोकामनाएं पूर्ण होने की मान्यता है।

 

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