देश में 2025-26 तक इस्पात विनिर्माण की चार करोड़ टन अतिरिक्त क्षमता जुड़ेगी : एसोचैम

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नई दिल्ली : वित्त वर्ष 2025-26 तक देश में इस्पात विनिर्माण की चार करोड़ टन की अतिरिक्त क्षमता के शुरू होने की उम्मीद है। लौह एवं इस्पात पर एसोचैम की राष्ट्रीय परिषद के चेयरमैन विनोद नोवाल ने दिल्ली में इंडिया स्टील समिट को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2030-31 तक घरेलू इस्पात उत्पादन क्षमता के 30 करोड़ टन और कच्चे इस्पात के उत्पादन की क्षमता के 25.5 करोड़ टन होने की संभावना है।

नोवाल जेएसडब्ल्यू भूषण पावर एंड स्टील लिमिटेड के चेयरमैन भी हैं। उन्होंने कहा, “वित्त वर्ष 2025-26 तक 3.5-4 करोड़ टन की विनिर्माण क्षमता जुड़ने के लिए तैयार है।” उद्योग निकाय भारतीय इस्पात संघ (आईएसए) के अनुसार, मार्च, 2023 तक देश की इस्पात विनिर्माण की स्थापित क्षमता 15.4 करोड़ टन है। अन्य चार करोड़ टन क्षमता जुड़ने से वित्त वर्ष 2025-26 तक कुल क्षमता 19.4 करोड़ टन हो जाएगी।

वाहन कलपुर्जा कंपनी प्रिकोल लिमिटेड ने अपनी प्रतिद्वंद्वी मिंडा कॉरपोरेशन द्वारा उसकी 24.5 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल करने के लिए भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) में दिए गए आवेदन की वैधता को मद्रास उच्च न्यायालय में चुनौती दी है। मिंडा कॉर्पोरेशन ने इस महीने की शुरुआत में 17 फरवरी को खुले बाजार से प्रिकोल के 1.91 करोड़ से अधिक शेयर खरीदकर 15.7 प्रतिशत हिस्सेदारी का अधिग्रहण किया था। उसके बाद मिंडा कॉरपोरेशन ने प्रिकोल में अपनी हिस्सेदारी को 24.5 प्रतिशत तक बढ़ाने के लिए सीसीआई का रुख किया था।

शेयर बाजारों को भेजी सूचना में प्रिकोल ने कहा कि उसने मिंडा कॉरपोरेशन लिमिटेड (मिंडा) के सीसीआई को दिए गए आवेदन के संबंध में मद्रास उच्च न्यायालय के समक्ष एक रिट याचिका दायर की है। उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने 24 मई, 2023 को रिट याचिका को स्वीकार करते हुए एक अंतरिम आदेश के माध्यम से मिंडा कॉरपोरेशन के सीसीआई को आवेदन पर निर्णय को रोक दिया और संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया।

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