ग्रेटर नोएडा में 90 डिग्री मोड़ बना फिर हादसे की वजह, कोहरे में नाले में गिरी कार; कम पानी होने से बची दो जिंदगियां
गौतमबुद्धनगर में सड़क सुरक्षा को लेकर उठे सवाल अभी थमे भी नहीं थे कि ग्रेटर नोएडा के कासना इलाके से एक और बड़ा हादसा सामने आ गया। इंजीनियर युवराज मेहता की मौत को अभी एक महीना भी नहीं हुआ है और अब इसी तरह का एक और मामला सामने आया है। हालांकि इस बार राहत की बात यह रही कि कार सवार दोनों लोगों की जान बच गई। शनिवार देर रात घने कोहरे के कारण एक कार रास्ता भटककर नाले में जा गिरी। गनीमत यह रही कि नाले में पानी का स्तर कम था, जिससे बड़ा हादसा टल गया।
कम विजिबिलिटी में नहीं दिखा 90 डिग्री मोड़
मिली जानकारी के मुताबिक, इटावा निवासी सुनील कुमार शनिवार देर रात करीब तीन बजे अपनी कार से लूक्सर से परी चौक की ओर जा रहे थे। कार को रिजवान चला रहा था और यह ओला टैक्सी से जुड़ी हुई थी। सुबह के वक्त इलाके में घना कोहरा छाया हुआ था। जब कार इकोटेक-6 स्थित ओप्पो कंपनी के पास से भाटी गोल चक्कर की तरफ बढ़ी, तभी गोल चक्कर से पहले बना 90 डिग्री का खतरनाक मोड़ दिखाई नहीं दिया। विजिबिलिटी बेहद कम होने के कारण कार सीधी नाले में जा गिरी।
नाले में कम पानी होने से टला बड़ा हादसा
हादसे के बाद कार नाले में सीधी खड़ी हो गई। नाले में पानी की मात्रा और बहाव दोनों ही कम थे, साथ ही गहराई भी ज्यादा नहीं थी। इसी वजह से कार में सवार दोनों लोग बिना किसी बड़ी चोट के सुरक्षित बाहर निकल आए। इसके तुरंत बाद घटना की सूचना डायल 112 पर दी गई। सूचना मिलते ही पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और स्थानीय लोगों की मदद से कार को नाले से बाहर निकलवाया गया।
प्रशासन हरकत में, मौके पर लगाई गई अस्थायी व्यवस्था
रविवार को मामले की जानकारी मिलते ही ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की टीम भी मौके पर पहुंची। प्रशासन की ओर से नाले के पास लकड़ी की बल्ली लगाकर उस पर रिफ्लेक्टर टेप चिपकाई गई और अस्थायी रूप से इलाके को कवर किया गया। बताया गया कि इससे पहले भी प्रशासन द्वारा नाले को मिट्टी डालकर कवर किया गया था, लेकिन पर्याप्त संकेतक न होने के कारण हादसा हो गया।
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे हादसे
गौरतलब है कि नोएडा सेक्टर-150 में हुए हादसे में इंजीनियर युवराज की मौत के बाद ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने कई ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए थे और कई जगहों पर रिफ्लेक्टर लगाए गए थे। इसके बावजूद कासना इलाके में 90 डिग्री मोड़ पर संकेत बोर्ड न होने से एक बार फिर हादसा सामने आ गया, जिसने प्रशासन की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।