कैश मिलने के विवाद के बीच बड़ा घटनाक्रम: जस्टिस यशवंत वर्मा ने राष्ट्रपति को सौंपा इस्तीफा, जांच प्रक्रिया जारी

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न्यायपालिका से जुड़े एक अहम घटनाक्रम में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस यशवंत वर्मा ने राष्ट्रपति को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। यह कदम उनके आवास से कथित रूप से नकदी मिलने के विवाद के बाद सामने आया है, जिसके चलते उनके खिलाफ आंतरिक जांच प्रक्रिया भी चल रही थी।

दिल्ली उच्च न्यायालय से तबादले के बाद बढ़ा मामला

सूत्रों के अनुसार, विवाद सामने आने के बाद उन्हें दिल्ली उच्च न्यायालय से इलाहाबाद उच्च न्यायालय स्थानांतरित कर दिया गया था। जस्टिस वर्मा ने 5 अप्रैल 2025 को पद की शपथ ली थी। उनके कार्यकाल के दौरान ही यह पूरा विवाद सामने आया, जिसके बाद न्यायिक और प्रशासनिक स्तर पर जांच शुरू कर दी गई थी।

जले हुए नोट मिलने के बाद शुरू हुआ विवाद

पिछले वर्ष मार्च में दिल्ली स्थित उनके आवास से जले हुए नोट मिलने की घटना ने पूरे मामले को गंभीर मोड़ दिया था। उस समय वह दिल्ली उच्च न्यायालय में कार्यरत थे। घटना से जुड़ा वीडियो सामने आने के बाद मामला और तूल पकड़ गया, जिसके बाद उन्हें वापस इलाहाबाद उच्च न्यायालय भेज दिया गया था।

संसदीय प्रक्रिया और जांच समिति की कार्रवाई

मामले को लेकर संसद में पिछले वर्ष अगस्त में न्यायाधीश को पद से हटाने के लिए बहुदलीय प्रस्ताव लाया गया था। इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष ने तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया था। बाद में समिति में आंशिक बदलाव भी किया गया। इस समिति की जांच प्रक्रिया अभी जारी है और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।

याचिका पर सर्वोच्च न्यायालय का रुख

इस मामले में जस्टिस वर्मा द्वारा दायर उस याचिका को भी खारिज कर दिया गया था, जिसमें संसदीय प्रक्रिया को चुनौती दी गई थी। सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया था कि संसद की कार्रवाई को किसी भी कानून के माध्यम से बाधित नहीं किया जा सकता।

 

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