पटना: बिहार के मुजफ्फरपुर में गुरुवार तड़के एक निजी अस्पताल के आईसीयू में लगी भीषण आग ने बड़ा हादसा खड़ा कर दिया। आग लगने के बाद अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी मच गई। हादसे में अब तक तीन मरीजों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि कई अन्य गंभीर मरीजों को सुरक्षित निकालकर दूसरे अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। प्रशासन को आशंका है कि मृतकों की संख्या बढ़ सकती है।
सुबह करीब तीन बजे आईसीयू वार्ड में अचानक आग लगने से पूरे क्षेत्र में धुआं फैल गया। उस समय वार्ड में कई गंभीर मरीज भर्ती थे, जो जीवन रक्षक उपकरणों के सहारे उपचार ले रहे थे। धुएं के कारण मरीजों को सांस लेने में भारी परेशानी होने लगी और हालात तेजी से बिगड़ गए।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और अग्निशमन विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं। राहत और बचाव अभियान चलाकर अस्पताल के आईसीयू से कुल 15 मरीजों को बाहर निकाला गया। इनमें से तीन मरीजों की जान नहीं बचाई जा सकी, जबकि अन्य मरीजों को तत्काल दूसरे अस्पतालों में स्थानांतरित कर उपचार शुरू कराया गया।
छह दमकल गाड़ियों ने संभाला मोर्चा
अग्निशमन विभाग के अधिकारियों के अनुसार सुबह लगभग 3:55 बजे आग लगने की सूचना प्राप्त हुई थी। सूचना मिलते ही छह दमकल वाहनों को मौके पर रवाना किया गया। दमकल कर्मियों ने काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया और अंदर फंसे मरीजों को बाहर निकालने का अभियान चलाया।
शॉर्ट सर्किट की आशंका, जांच शुरू
प्रारंभिक जांच में आग लगने की संभावित वजह शॉर्ट सर्किट मानी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि आईसीयू में ऑक्सीजन सपोर्ट सिस्टम, हार्ट मॉनिटर और कई अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण लगातार संचालित रहते हैं। ऐसे में किसी उपकरण में तकनीकी खराबी या विद्युत शॉर्ट सर्किट से आग भड़कने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि आग लगने के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है।
आईसीयू में थे 15 मरीज
जिला प्रशासन के मुताबिक अस्पताल के आईसीयू में 13 नियमित बेड के अलावा दो अतिरिक्त बेड भी लगाए गए थे। हादसे के समय सभी बेड पर गंभीर मरीज भर्ती थे। आग लगने के बाद सभी मरीजों को तत्काल अन्य अस्पतालों के आईसीयू में शिफ्ट करना पड़ा।
अस्पताल प्रबंधन पर उठे सवाल
हादसे के बाद अस्पताल प्रबंधन की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है। बताया जा रहा है कि घटना के समय अस्पताल का कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर मौजूद नहीं था। मीडिया द्वारा संपर्क किए जाने के बावजूद अस्पताल प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।
फिलहाल प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रण में बताया है। पुलिस, अग्निशमन विभाग और संबंधित एजेंसियां मामले की जांच कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच में किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।