मोबाइल और कोरियन कल्चर की लत ने घर-घर में लगाई सेंध, बच्चों को अकेलेपन, डिप्रेशन और आत्महत्या तक धकेल रहा खतरनाक ट्रेंड
साहिबाबाद। गाजियाबाद की तीन बहनों की आत्महत्या के बाद समाज के सामने एक ऐसा सवाल खड़ा हो गया है, जिसने हर माता-पिता की नींद उड़ा दी है। मोबाइल फोन और कोरियन कल्चर की बढ़ती लत अब सिर्फ शौक नहीं, बल्कि बच्चों और किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही है। इस दर्दनाक घटना के बाद कोरियन कल्चर के दुष्प्रभावों को लेकर हर स्तर पर चिंता और बहस तेज हो गई है।
घर-घर तक फैल रहा कोरियन कल्चर का असर
कोरियन म्यूजिक बैंड, वेब सीरीज, लाइफस्टाइल और गेमिंग कंटेंट का प्रभाव तेजी से बच्चों के जीवन में गहराता जा रहा है। हालात यह हैं कि घर-घर में कोरियन कल्चर का असर साफ दिखाई देने लगा है। आत्महत्या करने वाली तीनों बहनें भी कई गेमिंग और वीडियो एप्स को नियमित रूप से फॉलो करती थीं। मनोचिकित्सकों के पास पहुंच रहे मामलों में ऐसे केसों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जो उन्हें भी गंभीर चिंता में डाल रहे हैं।
बच्चों में बढ़ता अकेलापन और सामाजिक दूरी
मनोविशेषज्ञों का कहना है कि कोरियन कल्चर की चकाचौंध बच्चों को इस कदर आकर्षित कर रही है कि वे वहां के स्टार्स, किरदारों और गेमर्स को अपना आदर्श मानने लगे हैं। मोबाइल और डिजिटल कंटेंट की लत बच्चों को धीरे-धीरे परिवार और समाज से काट रही है। बच्चे अकेले रहना पसंद कर रहे हैं, न घरवालों से संवाद और न दोस्तों से मेलजोल। यही आदत आगे चलकर अवसाद और मानसिक असंतुलन का कारण बन रही है।
आत्महत्या की भावना तक पहुंच रहे बच्चे
तीन बहनों की घटना के बाद मोबाइल फोन का अनियंत्रित इस्तेमाल समाज के लिए एक बड़ा सवाल बन गया है। मनोचिकित्सकों के अनुसार, उनके पास आने वाले करीब 40 प्रतिशत मामलों में बच्चों में आत्महत्या की भावना पनपती दिख रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि माता-पिता की थोड़ी सी लापरवाही बच्चों के लिए बेहद भारी पड़ सकती है।
रील वर्ल्ड से रियल लाइफ में आते ही टूट रहा मानसिक संतुलन
डिजिटल और रील की दुनिया में डूबे बच्चे जब असल जिंदगी का सामना करते हैं तो उनकी सोच शून्य हो जाती है। कोरियन कल्चर की काल्पनिक दुनिया से बाहर निकलते ही वे खुद को संभाल नहीं पाते और मानसिक संतुलन बिगड़ने लगता है। इसी वजह से बड़ी संख्या में माता-पिता बच्चों को मनोचिकित्सकों और मनोवैज्ञानिकों के पास काउंसलिंग के लिए ले जा रहे हैं।
कई गेम्स और एप्स की आदी थीं तीनों बहनें
पुलिस जांच में सामने आया है कि तीनों बहनें टेक्नो गेमर्स, द बेबी एन येलो गेम, शिमर एंड शाइन, इविल नन जैसे कई गेम्स और चैनलों को फॉलो करती थीं। इन गेम्स में बिना किसी कंट्रोल के वीडियो और कमेंट्री चलती रहती है, जिनमें एक्शन और हॉरर कंटेंट होता है। ऐसे गेम्स बच्चों को तेजी से अपनी गिरफ्त में ले रहे हैं। इसके साथ ही तीनों बहनें कोरियन वेब सीरीज, फिल्में, सीरियल और के-पॉप म्यूजिक बैंड की भी जबरदस्त प्रशंसक थीं।
यूट्यूब चैनल बनाया, पिता ने किया डिलीट
तीनों बहनों ने करीब छह महीने पहले अपना एक यूट्यूब चैनल शुरू किया था, जिस पर वे कोरियन और जापानी कंटेंट अपलोड करती थीं। इस चैनल के करीब दो हजार फॉलोअर्स भी हो गए थे। जब पिता चेतन को इसकी जानकारी मिली तो उन्होंने करीब एक महीने पहले चैनल डिलीट कर दिया। पुलिस इस यूट्यूब अकाउंट से जुड़े हर पहलू की भी जांच कर रही है।
पैरेंटिंग में इन बातों पर बरतें खास सावधानी
विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों को जितना हो सके मोबाइल से दूर रखें और वे किस तरह का कंटेंट देख रहे हैं, इसकी नियमित निगरानी करें। बच्चों को सामाजिक और शारीरिक गतिविधियों से जोड़ना बेहद जरूरी है। यदि बच्चा अचानक लोगों से दूरी बनाने लगे या कार्यक्रमों में जाने से कतराने लगे तो यह खतरे की पहली घंटी हो सकती है। बच्चों के साथ संवाद बनाए रखना और दोस्ताना माहौल देना भी मानसिक स्वास्थ्य के लिए अहम है।
मनोचिकित्सक के पास जाने में न करें देरी
विशेषज्ञों का कहना है कि शुरुआती डिप्रेशन के लक्षण दिखने पर माता-पिता अक्सर समाज के डर से बच्चों को डॉक्टर के पास नहीं ले जाते। यही देरी आगे चलकर हालात को गंभीर बना देती है और मानसिक रिकवरी में ज्यादा समय लगने लगता है।
माता-पिता की भूमिका सबसे अहम
मनोचिकित्सकों के मुताबिक, उनके पास आने वाले अधिकांश मामलों में मोबाइल और कोरियन कल्चर की लत सामने आ रही है। करीब 40 प्रतिशत बच्चों में आत्महत्या की भावना पाई जा रही है। काउंसलिंग के जरिए बच्चों को इस लत से बाहर निकालने की कोशिश की जा रही है, लेकिन सबसे बड़ी जिम्मेदारी माता-पिता की है कि वे बच्चों से संवाद करें, उनकी गतिविधियों पर नजर रखें और मोबाइल का सीमित इस्तेमाल सुनिश्चित करें।
कोविड के बाद तेजी से बढ़े मामले
विशेषज्ञों का कहना है कि कोविड के बाद से बच्चों में मोबाइल लत के केसों में करीब 50 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है। हालात यह हैं कि कई बच्चे मोबाइल के कारण माता-पिता पर आक्रामक व्यवहार तक करने लगे हैं। कोरियन कल्चर की चमक-दमक बच्चों को तेजी से अपनी ओर खींच रही है, जिसे समय रहते संभालना बेहद जरूरी है।