राजस्थान में चिकित्सा क्षेत्र की बड़ी उपलब्धि: तीन साल की बच्ची के कान में लगाया गया एआई आधारित स्मार्ट कॉक्लियर इम्प्लांट
नई दिल्ली। राजस्थान के सरकारी स्वास्थ्य तंत्र को बड़ी चिकित्सा उपलब्धि मिली है। राजस्थान यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज से जुड़े सरकारी अस्पताल में पहली बार तीन साल की एक बच्ची के कान में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित स्मार्ट कॉक्लियर इम्प्लांट सफलतापूर्वक लगाया गया है। यह जटिल सर्जरी करीब तीन घंटे तक चली और डॉक्टरों के मुताबिक ऑपरेशन के बाद बच्ची की स्थिति स्थिर है।
करीब तीन घंटे चली सर्जरी, जल्द सुनने-बोलने की उम्मीद
ईएनटी विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. मोहनीश ग्रोवर ने बताया कि पूरी प्रक्रिया बेहद सावधानी से की गई और सर्जरी सफल रही। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन के बाद बच्ची की हालत सामान्य है और उम्मीद जताई जा रही है कि लगभग 21 दिनों के भीतर वह सुनने और बोलने की प्रक्रिया शुरू कर सकती है।
राज्य के सरकारी अस्पताल में पहली बार हुआ ऐसा ऑपरेशन
डॉ. ग्रोवर के अनुसार यह राज्य के किसी सरकारी अस्पताल में किया गया पहला उन्नत कॉक्लियर इम्प्लांट प्रोसीजर है। उन्होंने कहा कि इस तकनीक के सफल इस्तेमाल से कम सुनने वाले बच्चों के इलाज में नई संभावनाएं खुल सकती हैं और भविष्य में ऐसे कई मरीजों को इसका लाभ मिल सकेगा।
जन्म से सुनने में थी दिक्कत, धीरे-धीरे पूरी तरह बंद हो गई सुनने की क्षमता
डॉ. ग्रोवर ने बताया कि बच्ची को जन्म से ही सुनने में परेशानी थी, जो सामान्य सुनने और बोलने के विकास के लिए बड़ी चुनौती बन रही थी। शुरुआत में वह पूरी तरह बहरी नहीं थी और कुछ हद तक आवाज महसूस कर सकती थी, लेकिन दो साल की उम्र के बाद उसकी सुनने की क्षमता धीरे-धीरे पूरी तरह समाप्त हो गई।
क्या है कॉक्लियर इम्प्लांट और कैसे करता है काम
डॉक्टरों के अनुसार कॉक्लियर इम्प्लांट में एक हाई स्पीड प्रोसेसिंग चिप लगी होती है, जो ध्वनि की गुणवत्ता को बेहतर बनाती है। कान के भीतर लगाया जाने वाला इंटरनल इम्प्लांट करीब 30 साल तक काम कर सकता है, जबकि बाहरी साउंड प्रोसेसर की बैटरी लगभग तीन साल तक चलती है।
डॉ. ग्रोवर ने बताया कि इस इम्प्लांट में स्मार्ट नर्व टेक्नोलॉजी का उपयोग किया गया है, जो सर्जरी के दौरान सही स्थान निर्धारित करने में मदद करती है। इसमें मरीज की मैपिंग और डेटा सुरक्षित रखने के लिए इंटरनल मेमोरी भी होती है और इसे स्मार्टफोन की तरह समय-समय पर अपडेट किया जा सकता है।
राज्य में आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा में अहम कदम
मेडिकल एजुकेशन विभाग के आयुक्त नरेश कुमार गोयल ने इस उपलब्धि को राज्य के स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि यह सफलता राजस्थान में उन्नत चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक बड़ा कदम है और इससे मरीजों को आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं देने के प्रयासों को और मजबूती मिलेगी।