मेरठ: भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा पर जारी गोलीबारी और बढ़ते तनाव को देखते हुए मेरठ प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। मेडिकल कॉलेज समेत शहर के सभी सरकारी और निजी अस्पतालों में इमरजेंसी सेवाओं से जुड़े डॉक्टर्स और पैरामेडिकल स्टाफ की छुट्टियां तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी गई हैं। साथ ही, मेडिकल कॉलेज के CCU में होने वाली परीक्षाएं भी निरस्त कर दी गई हैं।
सीएमओ डॉ. अशोक कटारिया ने निर्देश जारी करते हुए कहा कि वर्तमान हालात को देखते हुए सभी अस्पतालों को 24 घंटे तैयार रहने की जरूरत है। उन्होंने सरकारी और निजी चिकित्सा संस्थानों को किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह अलर्ट रहने के आदेश दिए हैं।
FAIMA ने की डॉक्टरों से राष्ट्र सेवा की अपील
देश में बनते युद्ध जैसे हालात के बीच फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) ने भी डॉक्टरों और स्वास्थ्य संगठनों से राष्ट्रहित में सहयोग की अपील की है। FAIMA ने एक पत्र जारी करते हुए कहा है कि सभी राज्य और केंद्रशासित क्षेत्रों के रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन और चिकित्सा संघ रक्तदान शिविर आयोजित करें और सेना के साथ हरसंभव सहयोग करें।
FAIMA की कोर कमेटी ने आपातकालीन तैयारी के तहत कई सुझाव जारी किए हैं, जिसमें चिकित्सा संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने से लेकर आपदा प्रबंधन के लिए टीमें तैयार रखने तक के निर्देश शामिल हैं।
ऑपरेशन सिंदूर: भारत का करारा जवाब
पिछले दिनों जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने जवाबी कार्रवाई करते हुए पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों पर “ऑपरेशन सिंदूर” चलाया है। इस कार्रवाई में पाकिस्तान के कई आतंकी अड्डों को निशाना बनाया गया। इसके बाद से पाकिस्तान की ओर से नियंत्रण रेखा (LoC) पर लगातार फायरिंग की जा रही है।
बुधवार रात और गुरुवार को पाकिस्तान ने भारत के कई शहरों को मिसाइल, ड्रोन और फाइटर जेट्स से निशाना बनाने की कोशिश की, लेकिन भारतीय सेना ने अधिकतर हमलों को नाकाम कर दिया। जवाबी कार्रवाई में भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के 3 फाइटर जेट और दर्जनों मिसाइलों व ड्रोन्स को मार गिराया।
वैश्विक स्तर पर भी हलचल
भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता भी बढ़ा दी है। दुनियाभर के देशों की नजरें इस क्षेत्र की स्थिति पर टिकी हुई हैं। इस हालात में मेरठ समेत पूरे देश में चिकित्सा सेवाओं को युद्ध स्तर पर सक्रिय किया जा रहा है, ताकि किसी भी आपातकालीन परिस्थिति में नागरिकों और सैनिकों को त्वरित चिकित्सा सहायता मिल सके।