‘शोले’ की मौसी का अद्भुत जज्बा: लकवे के बाद भी जारी रखी शूटिंग, 73 की उम्र में जीता बेस्ट एक्ट्रेस अवॉर्ड
हिंदी सिनेमा की क्लासिक फिल्म ‘शोले’ आज भी अपने किरदारों और दमदार अभिनय के लिए याद की जाती है। जय-वीरू की दोस्ती से लेकर ठाकुर के रौब तक, हर भूमिका दर्शकों के दिलों में बस चुकी है। इन्हीं किरदारों में एक ऐसा चेहरा भी था, जिसने बेहद सादगी के साथ अमिट छाप छोड़ी—बसंती की मौसी। सफेद साड़ी में नजर आने वाली इस भूमिका को अभिनेत्री लीला मिश्रा ने निभाया था, जिन्हें आज भी उनकी सजीव अदाकारी के लिए याद किया जाता है।
पांच दशकों तक सिनेमा को समर्पित रहा जीवन
लीला मिश्रा हिंदी फिल्म इंडस्ट्री की उन चुनिंदा कलाकारों में शुमार थीं, जिन्होंने अपने जीवन के आखिरी पड़ाव तक अभिनय को ही प्राथमिकता दी। उन्होंने पांच दशकों से अधिक लंबे करियर में 200 से ज्यादा फिल्मों में काम किया। वर्ष 1975 में आई ‘शोले’ में उनका ‘बसंती की मौसी’ का किरदार सबसे ज्यादा लोकप्रिय रहा।
हालांकि, उनके करियर का एक और महत्वपूर्ण पड़ाव 1981 में आई फिल्म ‘नानी मां’ रही, जिसमें उनके अभिनय ने सभी को प्रभावित किया। इसी फिल्म के लिए उन्हें 73 साल की उम्र में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार मिला, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती है।
लकवाग्रस्त होने के बावजूद नहीं छोड़ा काम
लीला मिश्रा के समर्पण और पेशेवर प्रतिबद्धता की मिसाल फिल्म निर्माता साईं प्रांजपे ने एक इंटरव्यू में साझा की थी। उन्होंने बताया कि अपने जीवन के अंतिम दिनों में भी लीला मिश्रा ने अभिनय के प्रति अपना जुनून कम नहीं होने दिया।
साईं प्रांजपे के अनुसार, लीला मिश्रा लकवे का शिकार होने के बावजूद शूटिंग करती रहीं। यह उनके काम के प्रति समर्पण और साहस का सबसे बड़ा उदाहरण है, जिसने इंडस्ट्री के लोगों को भी हैरान कर दिया था।
‘कथा’ के दौरान दिखी उनकी अद्भुत समझ
साईं प्रांजपे ने 1983 में आई फिल्म ‘कथा’ में उनके साथ काम करने के अनुभव को याद करते हुए कहा कि लीला मिश्रा असाधारण प्रतिभा की धनी थीं। उन्होंने बताया कि बिना औपचारिक शिक्षा के भी उन्हें फिल्म निर्माण की गहरी समझ थी।
वह समय की पाबंद, अनुशासित और हर सीन को परफेक्शन के साथ निभाने वाली कलाकार थीं। उनके मुताबिक, लीला मिश्रा जैसी प्रोफेशनल और समर्पित अभिनेत्री बहुत कम देखने को मिलती हैं।
आखिरी फिल्म में दिखाई अटूट हिम्मत
साईं प्रांजपे ने लीला मिश्रा की आखिरी फिल्म ‘दाता’ की शूटिंग से जुड़ा एक मार्मिक किस्सा भी साझा किया। उन्होंने बताया कि शूटिंग के दौरान ही लीला मिश्रा को लकवा मार गया था, जिससे उनके शरीर का आधा हिस्सा प्रभावित हो गया था।
हालांकि, इस स्थिति में भी उन्होंने हार नहीं मानी। जब पूरी यूनिट असमंजस में थी और उन्हें इलाज के लिए मुंबई ले जाने की बात हो रही थी, तब लीला मिश्रा ने शूटिंग जारी रखने का फैसला किया। उन्होंने कैमरा टीम से अनुरोध किया कि उन्हें उस एंगल से शूट किया जाए, जहां उनकी स्थिति सामान्य दिखाई दे।
शूटिंग पूरी करने के बाद ही वह मुंबई लौटीं, लेकिन कुछ समय बाद उनका निधन हो गया। उनका यह जज्बा आज भी फिल्म इंडस्ट्री में समर्पण और पेशेवर ईमानदारी की मिसाल के तौर पर याद किया जाता है।