दिल्ली में साइबर अपराधियों की संपत्तियों पर बुलडोजर, ड्रग्स तस्करों जैसी कार्रवाई का ऐलान

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नई दिल्ली। साइबर अपराधियों ने देशभर के लोगों के जीवन को लगातार प्रभावित किया है, और मुख्य अपराधी अक्सर विदेश में बैठे रहते हैं। उनके द्वारा भारत में काम करने वाले गुर्गों—खाता मुहैया कराने वाले, खाता धारक और बैंक कर्मचारी—के माध्यम से पीड़ितों के खाते से रकम बाहर निकालकर विदेश भेजी जाती है। पुलिस इन गुर्गों को तो गिरफ्तार कर लेती है, लेकिन विदेश में बैठे मुख्य अपराधियों तक पहुंच पाना मुश्किल होता है।

साइबर अपराधियों पर ड्रग्स तस्करों जैसी कार्रवाई

मुख्य अपराधियों के न पकड़े जाने से साइबर धोखाधड़ी की घटनाओं में कमी नहीं आ रही है। यही वजह है कि दिल्ली पुलिस ने अब साइबर अपराधियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने का निर्णय लिया है। गृह मंत्रालय के निर्देश पर दिल्ली पुलिस ने साइबर अपराधियों की संपत्तियों पर वित्तीय जांच शुरू कर दी है। अब ड्रग्स तस्करों की तरह इन अपराधियों की संपत्तियों को जब्त कर बुलडोजर से ढहाने की कार्रवाई की जाएगी।

लाओस में बैठे विदेशी सिंडिकेट के लिए काम कर रहे थे आरोपी

क्राइम ब्रांच के एसीपी अनिल शर्मा की टीम ने हाल ही में खुर्जा, यूपी के अनीश और मणि सिंह को गिरफ्तार किया था। आरोप है कि दोनों एक इंजीनियर की बुजुर्ग मां को डिजिटल अरेस्ट कर 40 लाख रुपये की ठगी में शामिल थे। यह पहला मामला है जब गृह मंत्रालय और उपराज्यपाल वीके सक्सेना के निर्देश पर ऐसे आरोपी के खिलाफ वित्तीय जांच शुरू की गई है। पिछले एक साल से दोनों लाओस में बैठे विदेशी साइबर सिंडिकेट के लिए काम कर रहे थे और कमीशन के रूप में मोटी रकम लेकर लाखों की संपत्ति अर्जित की थी।

190 पीड़ितों से 100 करोड़ की ठगी का पता

सिंडिकेट के खिलाफ नेशनल क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज मामलों के अनुसार, 190 पीड़ितों से करीब 100 करोड़ रुपये की ठगी हुई। आरोपी अपने खातों में पैसे मंगवाकर विदेश भेजते थे। पुलिस के अनुसार, यह पैसा तीन तरीकों से ट्रांसफर किया गया—चेक बुक, एटीएम और एनएफटी। दोनों आरोपी सिंडिकेट को मदद देकर कमीशन में लाखों-करोड़ों रुपये कमा रहे थे।

संपत्तियों की पहचान और बुलडोजर कार्रवाई

पुलिस ने आरोपी की संपत्तियों की पहचान शुरू कर दी है। कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद यूपी सरकार की मदद से संपत्तियों को बुलडोजर से ढहा दिया जाएगा। यह कार्रवाई ड्रग्स माफिया के खिलाफ 2019 में शुरू की गई वित्तीय जांच के मॉडल पर होगी, जिसमें अब तक 18 माफिया की संपत्ति जब्त की जा चुकी है और कुछ संपत्तियों को ढहा भी दिया गया।

साइबर धोखाधड़ी के मामलों में लगातार वृद्धि

दिल्ली में पिछले 12 वर्षों में ऑनलाइन ठगी के मामले लगातार बढ़ते रहे हैं। 2014 में दर्ज 226 मामलों में 2.63 करोड़ रुपये की ठगी हुई थी, जबकि 2025 के पहले 6 महीनों में 184 मामलों में 70.64 करोड़ रुपये की ठगी दर्ज की गई। 2024 में यह राशि 8.17 अरब रुपये तक पहुंच चुकी थी, जिससे साइबर धोखाधड़ी की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

 

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