6 अप्रैल 1917: जब अमेरिका ने बदली दुनिया की दिशा, विल्सन ने क्यों किया प्रथम विश्व युद्ध में शामिल होने का ऐलान
प्रथम विश्व युद्ध 1914 में शुरू हुआ और शुरुआती ढाई साल तक अमेरिका इससे दूर रहा। उस समय अमेरिका ने तटस्थता की नीति अपनाई हुई थी, लेकिन 1917 आते-आते हालात ऐसे बने कि तत्कालीन राष्ट्रपति वुड्रो विल्सन को युद्ध में उतरने का बड़ा फैसला लेना पड़ा। यह फैसला न सिर्फ युद्ध की दिशा बदलने वाला साबित हुआ, बल्कि अमेरिका की वैश्विक भूमिका को भी पूरी तरह बदल गया।
6 अप्रैल 1917: अमेरिका ने जर्मनी के खिलाफ खोला मोर्चा
6 अप्रैल 1917 को अमेरिका ने जर्मनी के खिलाफ युद्ध की औपचारिक घोषणा कर दी। इससे पहले 1916 के चुनाव में विल्सन ने “हमें युद्ध से दूर रखा” का नारा दिया था, लेकिन जर्मनी की आक्रामक नीतियों ने परिस्थितियां पूरी तरह बदल दीं। हालात ऐसे हो गए कि अमेरिका के लिए युद्ध में शामिल होना अनिवार्य बन गया।
असीमित पनडुब्बी युद्ध बना सबसे बड़ा कारण
जर्मनी ने 1916 में “ससेक्स वादा” किया था कि वह यात्री और तटस्थ देशों के जहाजों पर हमला नहीं करेगा, लेकिन जनवरी 1917 में उसने यह वादा तोड़ दिया। जर्मनी ने असीमित पनडुब्बी युद्ध फिर शुरू कर दिया, जिसका उद्देश्य ब्रिटेन को आर्थिक रूप से तोड़ना था। इस दौरान कई अमेरिकी व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाया गया, जिनमें सैकड़ों अमेरिकी नागरिकों की मौत हुई। इससे अमेरिका में भारी गुस्सा फैल गया और इसे मानवता के खिलाफ कार्रवाई माना गया।
जिमरमैन टेलीग्राम ने भड़काया जनाक्रोश
जनवरी 1917 में जर्मनी के विदेश मंत्री आर्थर जिमरमैन ने मेक्सिको को एक गुप्त प्रस्ताव भेजा। इसमें कहा गया कि अगर अमेरिका युद्ध में शामिल होता है, तो मेक्सिको जर्मनी का साथ दे और बदले में उसे टेक्सास, न्यू मैक्सिको और एरिजोना जैसे क्षेत्र वापस दिलाए जाएंगे। ब्रिटिश खुफिया एजेंसियों ने इस टेलीग्राम को पकड़कर डिकोड किया और अमेरिका को जानकारी दी। 1 मार्च 1917 को जब यह खबर सार्वजनिक हुई, तो पूरे अमेरिका में आक्रोश की लहर दौड़ गई।
मित्र देशों की हार का खतरा भी बना दबाव
युद्ध के दौरान अमेरिका ब्रिटेन और फ्रांस जैसे देशों को हथियार, गोला-बारूद और भारी आर्थिक सहायता दे रहा था। 1917 तक अमेरिकी बैंकों ने करीब 2 अरब डॉलर का कर्ज इन देशों को दे दिया था। ऐसे में अगर मित्र राष्ट्र हार जाते, तो अमेरिका को बड़ा आर्थिक नुकसान होता। जर्मनी के हमलों से अमेरिकी व्यापार भी प्रभावित हो रहा था, जिससे दबाव और बढ़ गया।
जर्मनी की आक्रामकता से बदला अमेरिकी जनमत
बेल्जियम में जर्मनी के अत्याचारों की खबरें, 1915 में लुसिटानिया जहाज को डुबोना और जिमरमैन टेलीग्राम जैसे घटनाक्रमों ने अमेरिकी जनता की सोच बदल दी। राष्ट्रपति विल्सन ने इसे लोकतंत्र की रक्षा की लड़ाई बताते हुए जर्मनी के खिलाफ युद्ध की घोषणा को सही ठहराया।
कांग्रेस से मंजूरी के बाद हुआ युद्ध का ऐलान
2 अप्रैल 1917 को विल्सन ने कांग्रेस के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि दुनिया को लोकतंत्र के लिए सुरक्षित बनाना जरूरी है। 4 अप्रैल को सीनेट ने भारी बहुमत से युद्ध प्रस्ताव को मंजूरी दी और 6 अप्रैल को हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने भी इसे पास कर दिया। इसके साथ ही अमेरिका आधिकारिक रूप से युद्ध में कूद पड़ा।
युद्ध में एंट्री के बाद अमेरिका ने बदली तस्वीर
युद्ध में शामिल होते ही अमेरिका ने तेजी से अपनी सैन्य ताकत बढ़ाई। “सिलेक्टिव सर्विस एक्ट” के तहत लाखों युवाओं की भर्ती की गई और 1918 तक 20 लाख से ज्यादा सैनिक यूरोप भेजे गए। अमेरिकी सेना ने जर्मनी के हमलों को रोकने में अहम भूमिका निभाई और मित्र राष्ट्रों की जीत सुनिश्चित की।
वैश्विक ताकत के रूप में उभरा अमेरिका
इस फैसले के बाद अमेरिका की विदेश नीति में बड़ा बदलाव आया। जो देश पहले अलग-थलग रहने की नीति अपनाता था, वही अब वैश्विक राजनीति का केंद्र बन गया। बाद में विल्सन ने “14 सूत्रीय शांति योजना” पेश की, जिसने लीग ऑफ नेशंस की नींव रखी और अमेरिका को विश्व शक्ति के रूप में स्थापित किया।