हर साल 1 अप्रैल को दुनियाभर में हंसी-मजाक और शरारतों के साथ अप्रैल फूल डे मनाया जाता है। इस दिन लोग एक-दूसरे को मजाक में “फूल” बनाते हैं, लेकिन इसके पीछे का इतिहास काफी दिलचस्प और अलग-अलग मान्यताओं से जुड़ा हुआ है।
फ्रांस से जुड़ी सबसे प्रचलित कहानी
अप्रैल फूल डे की शुरुआत को लेकर सबसे लोकप्रिय मान्यता फ्रांस से जुड़ी है। माना जाता है कि साल 1582 में जब जूलियन कैलेंडर की जगह ग्रेगोरियन कैलेंडर लागू किया गया, तब नए साल की शुरुआत 1 अप्रैल से बदलकर 1 जनवरी कर दी गई।
हालांकि, कई लोग पुरानी परंपरा के अनुसार 1 अप्रैल को ही नया साल मनाते रहे। ऐसे लोगों का मजाक उड़ाया जाने लगा और उन्हें “अप्रैल फूल” कहा जाने लगा। धीरे-धीरे यह परंपरा मजाक और शरारत के रूप में विकसित होकर एक खास दिन बन गई।
इतिहास में और भी मिलते हैं संकेत
अप्रैल फूल डे को लेकर अन्य मान्यताएं भी मौजूद हैं। कुछ इतिहासकार इसकी शुरुआत 1381 से जोड़ते हैं, जब जॉफरी चौसर की प्रसिद्ध रचना ‘कैंटरबरी टेल्स’ में 1 अप्रैल के आसपास मजाक से जुड़ा एक प्रसंग मिलता है।
इसके अलावा प्राचीन रोम में मार्च के अंत में ‘हिलेरिया’ नाम का उत्सव मनाया जाता था, जिसमें लोग भेष बदलकर एक-दूसरे के साथ मजाक करते थे। इसे भी इस परंपरा की एक पुरानी झलक माना जाता है।
मजाक से बना वैश्विक उत्सव
समय के साथ यह परंपरा यूरोप से निकलकर पूरी दुनिया में फैल गई और आज 1 अप्रैल को हंसी-मजाक, हल्के-फुल्के प्रैंक और मनोरंजन के रूप में मनाया जाता है। हालांकि, इस दिन मजाक की भी एक मर्यादा होती है, ताकि किसी की भावनाएं आहत न हों।