असम में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma ने बड़ा बयान देते हुए साफ किया है कि राज्य में लागू होने वाले यूसीसी से आदिवासी समुदायों को बाहर रखा जाएगा। इस बयान को चुनावी रणनीति के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है।
आदिवासी समुदाय को मिलेगी छूट
सीएम सरमा ने स्पष्ट तौर पर कहा कि यूसीसी लागू होने के बावजूद आदिवासी समाज की परंपराओं और अधिकारों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने भरोसा जताया कि सरकार उनकी सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं की पूरी तरह रक्षा करेगी।
पीएम मोदी की जनसभा के बाद आया बयान
यह टिप्पणी प्रधानमंत्री Narendra Modi की गोगमुख में हुई जनसभा के बाद सामने आई है। इस जनसभा में पीएम मोदी ने असम में यूसीसी लागू करने के संकल्प को दोहराया था, साथ ही छठी अनुसूची वाले क्षेत्रों और स्थानीय परंपराओं के संरक्षण की बात भी कही थी।
महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान पर जोर
सीएम सरमा ने कहा कि यूसीसी के जरिए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि महिलाओं के साथ किसी तरह का अन्याय न हो। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं की गरिमा, सुरक्षा और अधिकारों को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है और इसी दिशा में यह कदम उठाया जा रहा है।
‘असम की पहचान भी रहेगी सुरक्षित’
सरमा ने यह भी कहा कि यूसीसी लागू करना केवल कानूनी सुधार नहीं, बल्कि असम की पहचान और सामाजिक संतुलन को बनाए रखने का प्रयास है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि आदिवासी परंपराओं, छठी अनुसूची के प्रावधानों और स्थानीय संस्कृति को पूरी तरह संरक्षित रखा जाएगा।
क्या है यूसीसी का उद्देश्य
समान नागरिक संहिता का उद्देश्य विवाह, तलाक और उत्तराधिकार जैसे मामलों में अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों की जगह एक समान और धर्मनिरपेक्ष कानूनी व्यवस्था लागू करना है। इसका मकसद समाज में समानता, राष्ट्रीय एकता और लैंगिक न्याय को बढ़ावा देना है।