भोपाल: मध्य प्रदेश वन्यजीव संरक्षण के तहत राज्य के जंगलों (Forests) से गायब हो गए जंगली भैंसों को फिर से बसाने की योजना बनाई है. इस योजना के तहत, जंगली भैंसों को असम (Assam) से लाया जाएगा और कान्हा-किसली क्षेत्र में फिर से बसाया जाएगा. जंगली भैंसें कान्हा टाइगर रिजर्व में रहेंगे. वहीं एमपी इसके बादले असम को बाघों का एक जोड़ा और 6 मगरमच्छ देगा. गुरुवार को गुवाहाटी में असम के सीएम हेमंत बिस्वासरमा और एमपी सीएम डाॅ. मोहन यादव के बीच वन्यजीवों के अदान प्रदान को लेकर सहमति बनी है. असम से एमपी में दो जोड़ी गैंडे भी आएंगे, जिन्हें वन विहार नेशनल पार्क में रखा जाएगा.
सीएम डॉ. मोहन यादव ने इस प्रोजेक्ट को चीता पुनर्वास कार्यक्रम के बाद राज्य की जैव विविधता यात्रा में एक स्वाभाविक प्रगति बताया है. उन्होंने कहा कि जंगली भैंसों की वापसी मध्य प्रदेश की पारिस्थितिक पहचान को मजबूत करेगी, जिससे देश के ‘टाइगर स्टेट’ और ‘लेपर्ड स्टेट’ के रूप में इसकी स्थिति और मजबूत होगी. उन्होंने जोर देकर कहा कि यह प्रयास सिर्फ एक प्रजाति को वापस लाने के बारे में नहीं है, बल्कि उन वन पारिस्थितिक तंत्रों में संतुलन बहाल करने के बारे में है जो कभी इस पर निर्भर थे.

देहरादून स्थित भारतीय वन्यजीव संस्थान की ओर से किए गए वैज्ञानिक अध्ययन में एमपी के कान्हा टाइगर रिजर्व को जंगली भैंसों के लिए उपयुक्त माना गया है. 18वीं शताब्दी में जंगली भैंसे एमपी में पाए जाते थे. जलवायु परिवर्तन और शिकार आदि के कारण धीरे-धीरे वह गायब हो गए. जंगली भैंसे असम और छत्तीसगढ़ में सीमित हैं.
जानवरों को वापस लाने का काम चरणबद्ध तरीके से होगा. पहले तीन सालों में हर साल 12 से 15 जंगली भैंसे लाए जाएंगे. शुरुआत में, जानवरों को शिकारी-प्रूफ बाड़ों में रखा जाएगा, जिसका इंफ्रास्ट्रक्चर 2026 की शुरुआत तक तैयार होने की उम्मीद है. असम तीन साल में मध्य प्रदेश को 50 जंगली भैंसें देगा, साथ ही उपलब्धता के आधार पर गैंडे और हाथियों के जोड़े और किंग कोबरा भी देगा. इसके बदले में मध्य प्रदेश बाघों का एक जोड़ा और 6 मगरमच्छ देगा.