प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बरेली के एक हाई-प्रोफाइल मामले में अहम फैसला सुनाते हुए आरोपी नीरज कुमार और अन्य के खिलाफ दायर दुष्कर्म केस को रद कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि महिला ने संबंध स्वेच्छा से बनाए हैं तो इसे दुष्कर्म नहीं कहा जा सकता। साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि याची ने पीड़िता की कोई फोटो वायरल नहीं की, और पीड़िता ने वाट्सएप चैट के जरिए गाइडेंस लेती रही, इसलिए फोटो वायरल कर ब्लैकमेल करने का आरोप साबित नहीं होता।
कोर्ट ने दिए ठोस कारण
न्यायमूर्ति अवनीश सक्सेना की एकल पीठ ने अपने आदेश में कहा कि यदि महिला ने शुरुआत से ही शादी के वादे को झूठा माना होता तो वह तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज कराती। लेकिन एक साल तीन महीने तक शिकायत नहीं की गई, जो संकेत है कि महिला ने स्वेच्छा से संबंध बनाए थे। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि पीड़िता के बयान में विरोधाभास है। पहले उसने कहा कि उसने संबंध बनाए, लेकिन बाद में कहा कि वह दबाव में थी।
सुप्रीम कोर्ट के प्रशांत बनाम दिल्ली राज्य 2024 फैसले का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि यदि दो लोग लंबे समय तक संबंध बनाए रखते हैं तो यह समझना मुश्किल है कि किसी एक पक्ष पर दबाव था। इस मामले में भी यही स्थिति देखी गई।
वाट्सएप चैट और सबूतों की कमी
अदालत ने कहा कि उपलब्ध सबूतों के आधार पर आरोपितों को फंसाने के लिए कोई ठोस प्रमाण नहीं है। वाट्सएप चैटिंग से यह स्पष्ट होता है कि दोनों के बीच संबंध गहरे थे और केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं थे।
मुकदमे का विवरण
आरोपितों ने बीएनएसएस की धारा 528 के तहत आवेदन देकर आरोप पत्र और संपूर्ण केस कार्यवाही रद करने की मांग की थी। मामला थाना इज्जतनगर, बरेली का है, और एफआईआर 1 दिसंबर 2024 को दर्ज कराई गई थी। पीड़िता विवाहित हैं और उनका पति सेना में कार्यरत है।
अभियोजन के अनुसार, पीसीएस परीक्षा की तैयारी के दौरान पीड़िता को एक मित्र ने अपने भाई से मिलवाया। आरोपी ने जन्मदिन की पार्टी के बहाने होटल में बुलाकर अश्लील वीडियो और तस्वीरें बनाईं और फिर धमकी देकर दोबारा बुलाया। इसके बाद दो बार और इसी तरह की घटना हुई। आरोपित ने दावा किया कि बाद में नीरज के चचेरे भाई ने भी यौन संबंध बनाने की मांग की, और न करने पर वीडियो/तस्वीरें पीड़िता के परिवार को भेज दीं।