IAS-टीचर बनने से पहले ‘एक्सपर्ट मां’ बनें… राज्यपाल का बड़ा संदेश, यूट्यूब से खाना सीखने वाली बात पर भी की टिप्पणी

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कानपुर: छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) के 41वें दीक्षांत समारोह में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने छात्र-छात्राओं को आत्मनिर्भर बनने के साथ समाज और राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने का संदेश दिया। इस दौरान उन्होंने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि वे आईएएस, शिक्षक या किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ें, लेकिन उससे पहले एक कुशल और जिम्मेदार मां बनने की तैयारी भी करें। उन्होंने शादी के बाद यूट्यूब देखकर खाना बनाना सीखने की प्रवृत्ति पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि बेटियों को पहले से ही भोजन बनाना आना चाहिए।

उन्होंने कहा कि डिग्री प्राप्त करना अंतिम लक्ष्य नहीं, बल्कि समाज और देश की सेवा का नया अध्याय है। विद्यार्थियों को अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग राष्ट्रहित में करना चाहिए। साथ ही पढ़ाई के साथ किसी न किसी हुनर को भी सीखना जरूरी है, क्योंकि आत्मनिर्भर युवा ही विकसित भारत की मजबूत नींव बनेंगे।

दीक्षांत समारोह में बेटियों का रहा दबदबा

वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई प्रेक्षागृह में आयोजित समारोह में इस वर्ष 1,07,713 विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान की गई। विश्वविद्यालय की ओर से कुल 96 पदक दिए गए, जिनमें 82 प्रतिशत से अधिक पदकों पर छात्राओं ने कब्जा जमाया। वहीं 92 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि भी प्रदान की गई।

समारोह में एआईसीटीई के चेयरमैन एवं दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. योगेश कुमार सिंह मुख्य अतिथि रहे। उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय और उच्च शिक्षा राज्यमंत्री रजनी तिवारी विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे। कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक और प्रति कुलपति प्रो. सुधीर अवस्थी ने सभी अतिथियों का स्वागत किया।

‘विश्वविद्यालय केवल डिग्री बांटने के केंद्र नहीं’

राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि विश्वविद्यालय केवल डिग्री वितरित करने वाले संस्थान नहीं हैं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की प्रयोगशालाएं हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे अपने ज्ञान का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाएं। उन्होंने विश्वविद्यालय की प्रगति की सराहना करते हुए कहा कि पिछले पांच वर्षों में परिसर में छात्र संख्या में 131.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

युवाओं को प्रेरित करते हुए उन्होंने कहा कि जिस तरह कपड़ों को निचोड़कर पानी पूरी तरह निकाल दिया जाता है, उसी तरह विद्यार्थी भी अपने ज्ञान और क्षमता को पूरी तरह देश सेवा में समर्पित करें।

चरित्र ही असली शिक्षा की पहचान: प्रो. योगेश कुमार सिंह

मुख्य अतिथि प्रो. योगेश कुमार सिंह ने कहा कि डिग्रियां केवल शिक्षा पर किए गए खर्च का प्रमाण हैं, जबकि वास्तविक शिक्षा व्यक्ति के चरित्र और व्यवहार में दिखाई देती है। उन्होंने विद्यार्थियों से जीवन में केवल दर्शक नहीं, बल्कि नेतृत्वकर्ता बनने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि यदि विद्यार्थी विदेश में शिक्षा या अनुभव प्राप्त करें तो उसके बाद भारत लौटकर देश के विकास में योगदान दें। विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को हासिल करने में युवाओं और विश्वविद्यालयों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उन्होंने कहा कि वर्तमान चार ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था को 25 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाने में नई पीढ़ी निर्णायक भूमिका निभाएगी। इस दौरान उन्होंने मार्टिन लूथर किंग जूनियर का संदेश दोहराते हुए कहा कि यदि दौड़ नहीं सकते तो चलिए, यदि चल नहीं सकते तो रेंगिए, लेकिन आगे बढ़ना कभी मत छोड़िए।

माता-पिता और गुरु का योगदान सबसे बड़ा

उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि विद्यार्थियों की सफलता के पीछे माता-पिता का त्याग और शिक्षकों का मार्गदर्शन सबसे बड़ी ताकत होता है। उन्होंने युवाओं से राष्ट्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की अपील की। वहीं उच्च शिक्षा राज्यमंत्री रजनी तिवारी ने कहा कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता और निरंतर मेहनत ही हर उपलब्धि का आधार है।

कुलपति ने गिनाईं विश्वविद्यालय की उपलब्धियां

कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने वार्षिक प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए कहा कि सीएसजेएमयू अब पारंपरिक शिक्षा तक सीमित नहीं है। विश्वविद्यालय नवाचार, अनुसंधान, स्टार्टअप, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, वैश्विक सहयोग और रोजगारपरक शिक्षा के क्षेत्र में लगातार नई पहचान बना रहा है।

पदकों और पीएचडी में भी छात्राओं का शानदार प्रदर्शन

विश्वविद्यालय ने इस वर्ष 51 विद्यार्थियों को कुल 96 पदक प्रदान किए। इनमें 42 छात्राएं और नौ छात्र शामिल रहे। कुलाधिपति, कुलपति तथा प्रायोजित सभी श्रेणियों के अधिकांश पदकों पर छात्राओं का दबदबा रहा। 92 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि दी गई, जिनमें 50 छात्राएं और 42 छात्र शामिल हैं। वहीं डिग्री प्राप्त करने वाले 1,07,713 विद्यार्थियों में 57,348 छात्राएं और 50,365 छात्र रहे।

अंचल पी. बिजलानी को मिली डी.लिट की मानद उपाधि

समारोह के दौरान कच्छ चर्म शिल्प के संरक्षण और विकास में उल्लेखनीय योगदान के लिए शिल्पाचार्य अंचल पी. बिजलानी को डॉक्टर ऑफ लेटर्स (डी.लिट.) की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया। इसके साथ ही कुलाधिपति ने डिजिटल हस्ताक्षर कर विद्यार्थियों की डिग्रियां और अंकपत्र डिजीलॉकर पर भी जारी किए।

सर्वाइकल कैंसर टीकाकरण अभियान की हुई शुरुआत

दीक्षांत समारोह के दौरान किशोरियों के लिए सर्वाइकल कैंसर से बचाव हेतु निश्शुल्क टीकाकरण अभियान का शुभारंभ भी किया गया। इसके अलावा विश्वविद्यालय की कई नई परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास हुआ तथा उत्कृष्ट कार्य करने वाले चार शिक्षकों को सम्मानित किया गया।

 

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