नोएडा इंजीनियर मौत केस में बड़ा एक्शन, SIT जांच में जुटी, आरोपी बिल्डर गिरफ्तार; 96 घंटे बाद बाहर निकली कार

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नोएडा। सेक्टर-150 स्थित निर्माणाधीन बेसमेंट में कार समेत डूबे सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में जांच और कार्रवाई ने रफ्तार पकड़ ली है। मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी ने मंगलवार को नोएडा पहुंचकर जांच शुरू की, वहीं पुलिस ने बेसमेंट निर्माण से जुड़े एमजेड विजटाउन के निदेशक बिल्डर अभय कुमार को गिरफ्तार कर लिया है। हादसे के 96 घंटे बाद एनडीआरएफ और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में बेसमेंट में डूबी कार को बाहर निकाला गया।

आरोपी बिल्डर गिरफ्तार, दूसरे की तलाश जारी
पुलिस के मुताबिक आरोपी बिल्डर अभय कुमार ने दो साल पहले बेसमेंट निर्माण के लिए जमीन में गड्ढा खुदवाया था, जिसमें पानी भर गया। इसी पानी में शुक्रवार को युवराज मेहता कार समेत डूब गए थे। पुलिस ने एक बिल्डर को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि दूसरे आरोपी की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है।

घटना के विरोध में निकला कैंडल मार्च
हादसे से नाराज शहरवासियों ने जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग को लेकर कैंडल मार्च निकाला। उधर मुख्यमंत्री के निर्देश पर गठित एसआईटी टीम मंगलवार को सबसे पहले नोएडा प्राधिकरण कार्यालय पहुंची, जहां पीड़ित परिवार के बयान दर्ज किए गए।

पीड़ित पिता ने सुनाई आपबीती
युवराज के पिता ने एसआईटी को बताया कि हादसे के वक्त वह बेटे को बचाने के लिए लगातार गुहार लगाते रहे, लेकिन मौके पर मौजूद पुलिस, दमकल और एसडीआरएफ के जवानों ने समय पर प्रभावी रेस्क्यू नहीं किया। ठंडे पानी और संसाधनों की कमी का हवाला देकर सिर्फ रस्सी फेंककर औपचारिकता की गई। एनडीआरएफ को भी देरी से सूचना दी गई।

एसडीआरएफ और दमकल कर्मियों से पूछताछ
एसआईटी ने पुलिस, एसडीआरएफ और दमकल कर्मियों के बयान भी दर्ज किए। बचाव कर्मियों ने घने कोहरे, शून्य दृश्यता, पानी के भीतर सरिया और पर्याप्त संसाधन न होने की बात कही। टीम ने दोपहर बाद घटनास्थल का निरीक्षण कर तमाम तकनीकी और प्रशासनिक पहलुओं की जानकारी जुटाई।

अधिकारियों से लंबी बैठक, हर पहलू की जांच
एसआईटी टीम में एडीजी मेरठ जोन भानु भास्कर, मंडलायुक्त भानु चंद्र गोस्वामी और पीडब्ल्यूडी के मुख्य अभियंता अजय वर्मा शामिल रहे। पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह और जिलाधिकारी मेधा रूपम भी मौके पर मौजूद रहीं। प्राधिकरण कार्यालय में अधिकारियों से लंबी बैठक कर जिम्मेदारियों की पड़ताल की गई।

पांच दिन में रिपोर्ट सौंपेगी SIT
एडीजी भानु भास्कर ने बताया कि पांच दिनों में हर स्तर पर जांच कर यह स्पष्ट किया जाएगा कि हादसा किसकी लापरवाही से हुआ। पुलिस, प्रशासन, नोएडा प्राधिकरण, दमकल, एसडीआरएफ और एनडीआरएफ सभी की भूमिका की जांच की जा रही है। दोषी पाए जाने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

बैरिकेडिंग न होने से हुआ हादसा
पुलिस के अनुसार घटनास्थल पर न तो बैरिकेडिंग थी और न ही रिफ्लेक्टर लगे थे। इसी कारण यह हादसा हुआ। पीड़ित पिता की तहरीर पर 18 जनवरी को नॉलेज पार्क थाना पुलिस ने एमजेड विशटाउन और लोटस ग्रीन बिल्डर्स के खिलाफ केस दर्ज किया था। गिरफ्तार बिल्डर को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया है।

 

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