Delhi-NCR में Air Pollution पर बड़ा एक्शन, 157 मॉनिटरिंग स्टेशनों से मिलेगी रियल-टाइम और सटीक जानकारी

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नई दिल्ली। दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में वायु प्रदूषण से निपटने की रणनीति अब और अधिक वैज्ञानिक और डेटा-आधारित होने जा रही है। प्रदूषण की सटीक निगरानी के लिए “कंटीन्यूअस एंबिएंट एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशंस” (CAAQMS) के नेटवर्क का बड़े पैमाने पर विस्तार किया जा रहा है, जिससे पूरे क्षेत्र में रियल-टाइम और भरोसेमंद आंकड़े उपलब्ध होंगे। यह कदम प्रदूषण नियंत्रण के लिए नीति निर्माण और त्वरित कार्रवाई को और प्रभावी बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

निगरानी नेटवर्क होगा और मजबूत, 27 नए स्टेशन प्रक्रिया में

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) मौजूदा निगरानी ढांचे की लगातार समीक्षा कर रहा है। फिलहाल दिल्ली सहित एनसीआर में कुल 84 मॉनिटरिंग स्टेशन संचालित हैं। इनमें दिल्ली में 40, हरियाणा एनसीआर में 22, राजस्थान एनसीआर में 4 और उत्तर प्रदेश एनसीआर में 18 स्टेशन शामिल हैं।

इसी क्रम में 27 नए स्टेशन स्थापित किए जा रहे हैं। दिल्ली में 6 नए स्टेशन पहले ही स्थापित हो चुके हैं। वहीं हरियाणा एनसीआर में 7, राजस्थान एनसीआर में 4 और उत्तर प्रदेश एनसीआर में 10 स्टेशनों की स्थापना अंतिम चरण में है। नए स्टेशनों के जुड़ने से निगरानी की क्षमता और डेटा की विश्वसनीयता दोनों में वृद्धि होगी।

वैज्ञानिक मानदंडों के आधार पर होगा भविष्य का विस्तार

आयोग ने स्पष्ट किया है कि आने वाले समय में मॉनिटरिंग नेटवर्क का विस्तार पूरी तरह वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप किया जाएगा। इसके तहत निगरानी केंद्रों का घनत्व जनसंख्या वितरण, भूमि उपयोग की प्रकृति—जैसे आवासीय, ट्रैफिक, औद्योगिक और पृष्ठभूमि क्षेत्र—और शहरी विस्तार की वास्तविक स्थिति को ध्यान में रखकर तय किया जाएगा।

ग्रिड-आधारित स्थानिक कवरेज की योजना बनाई गई है ताकि किसी भी क्षेत्र में डेटा गैप न रहे। साथ ही क्षेत्रीय प्रदूषकों के परिवहन को समझने और बेसलाइन एयर क्वालिटी को मापने के लिए बैकग्राउंड और बॉर्डर स्टेशन स्थापित करने पर भी जोर दिया गया है।

हर 25 वर्ग किमी पर एक स्टेशन, बड़े शहरों में सघन निगरानी

नई योजना के तहत दिल्ली और उससे सटे शहरों—गाजियाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, फरीदाबाद और सोनीपत—में लगभग हर 25 वर्ग किलोमीटर (5×5 किमी ग्रिड) पर एक मॉनिटरिंग स्टेशन स्थापित किया जाएगा।

वहीं अन्य जिला मुख्यालयों और शहरों में हर 50 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में एक स्टेशन की व्यवस्था होगी। उप-शहरी इलाकों में विशेष निगरानी पर भी बल दिया गया है ताकि प्रदूषण के इनफ्लो और आउटफ्लो तथा शहरी फैलाव के प्रभाव का सटीक आकलन किया जा सके।

कुल 157 स्टेशन करेंगे निगरानी, पूरे NCR में एकसमान कवरेज

वैज्ञानिक आकलन के बाद पूरे दिल्ली-एनसीआर में समान और व्यापक निगरानी सुनिश्चित करने के लिए 46 अतिरिक्त स्टेशनों की जरूरत चिन्हित की गई है। इनमें दिल्ली में 14, हरियाणा एनसीआर में 16, राजस्थान एनसीआर में 1 और उत्तर प्रदेश एनसीआर में 15 स्टेशन शामिल हैं।

इन सभी स्टेशनों की स्थापना पूरी होने के बाद दिल्ली और एनसीआर में कुल मॉनिटरिंग स्टेशनों की संख्या 157 हो जाएगी। इसमें दिल्ली में 60, हरियाणा एनसीआर में 45, राजस्थान एनसीआर में 9 और उत्तर प्रदेश एनसीआर में 43 स्टेशन संचालित होंगे।

विशेषज्ञों के अनुसार, इतने बड़े नेटवर्क से मिलने वाला विस्तृत डेटा न सिर्फ प्रदूषण के स्रोतों की पहचान में मदद करेगा, बल्कि समय रहते नियंत्रणात्मक कदम उठाने में भी अहम भूमिका निभाएगा।

 

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