नई दिल्ली। विदेश में मेडिकल की पढ़ाई करने का सपना देख रहे भारतीय छात्रों के लिए महत्वपूर्ण चेतावनी जारी की गई है। नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने हाल ही में एक एडवाइजरी जारी कर उज्बेकिस्तान में मेडिकल शिक्षा से जुड़े जोखिमों और धोखाधड़ी के मामलों को लेकर छात्रों को सतर्क रहने को कहा है। यह कदम ताशकंद स्थित भारतीय दूतावास द्वारा उठाई गई गंभीर चिंताओं के बाद सामने आया है।
इन मेडिकल संस्थानों पर उठे सवाल
एडवाइजरी में कुछ प्रमुख संस्थानों को लेकर गंभीर आशंकाएं जताई गई हैं। इनमें बुखारा स्टेट मेडिकल इंस्टीट्यूट, समरकंद स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी और ताशकंद स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी जैसे संस्थान शामिल हैं। आरोप है कि इन संस्थानों में निर्धारित क्षमता से अधिक छात्रों को प्रवेश दिया जा रहा है, जिससे पढ़ाई और प्रशिक्षण की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।
इंग्लिश मीडियम के नाम पर भ्रम, ट्रेनिंग पर असर
भारतीय दूतावास के अनुसार, इन कोर्सों का प्रचार अंग्रेजी माध्यम में होने का दावा किया जाता है, लेकिन हकीकत में कई शिक्षकों को अंग्रेजी का पर्याप्त ज्ञान नहीं है। इसके चलते भारतीय छात्रों को जरूरी क्लिनिकल और प्रैक्टिकल ट्रेनिंग नहीं मिल पा रही है, जो उनके करियर के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
NMC ने नियमों का पालन करने की दी सख्त चेतावनी
एनएमसी ने बेंगलुरु स्थित टीआईटी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज को भी चेतावनी दी है, जो उज्बेकिस्तान के एक संस्थान के ऑफशोर कैंपस के रूप में कार्य कर रहा था। आयोग ने स्पष्ट किया है कि इस तरह की व्यवस्था भारत के नियामक नियमों के खिलाफ है।
साथ ही NMC ने दोहराया कि जो छात्र Foreign Medical Graduate Licentiate Regulations 2021 का पालन नहीं करेंगे, उन्हें भारत में मेडिकल प्रैक्टिस की अनुमति नहीं दी जाएगी।
छात्रों को सतर्क रहने की सलाह
आयोग ने मेडिकल छात्रों को विदेश में दाखिला लेने से पहले संस्थानों की मान्यता, शिक्षा की गुणवत्ता और नियामक शर्तों की पूरी जांच करने की सलाह दी है, ताकि भविष्य में किसी तरह की परेशानी से बचा जा सके।