ईरान युद्ध पर ट्रंप को बड़ा झटका? अमेरिकी संसद ने सैन्य कार्रवाई सीमित करने वाले प्रस्ताव को दी मंजूरी, आगे क्या होगा
वाशिंगटन: अमेरिका की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने ईरान के खिलाफ जारी सैन्य कार्रवाई को सीमित करने और युद्ध संबंधी अधिकारों पर नियंत्रण बढ़ाने वाले प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस फैसले को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की विदेश नीति के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक चुनौती माना जा रहा है। हालांकि इससे युद्ध तत्काल नहीं रुकेगा, लेकिन ईरान को लेकर अमेरिकी रणनीति पर नई बहस शुरू हो गई है।
प्रतिनिधि सभा में हुए मतदान के दौरान प्रस्ताव के पक्ष में 215 और विरोध में 208 वोट पड़े। इस दौरान कुछ रिपब्लिकन सांसदों ने भी डेमोक्रेट्स का साथ दिया, जिसके चलते प्रस्ताव पारित हो गया। इसे ट्रंप प्रशासन के खिलाफ बढ़ते असंतोष के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
युद्ध को लेकर बढ़ा राजनीतिक विरोध
ईरान को लेकर अमेरिका की सैन्य कार्रवाई पिछले तीन महीनों से चर्चा के केंद्र में है। युद्ध की बढ़ती लागत और लंबे समय तक जारी संघर्ष को लेकर संसद में लगातार सवाल उठ रहे थे। इसी बीच डेमोक्रेटिक नेतृत्व ने इस अभियान को “महंगा और लापरवाह युद्ध” बताते हुए इसे समाप्त करने की मांग तेज कर दी।
विपक्षी नेताओं का दावा है कि इस संघर्ष से अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर भारी बोझ पड़ा है और करदाताओं के अरबों डॉलर खर्च हो चुके हैं। वहीं बढ़ती ईंधन कीमतों और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर असर को भी प्रमुख कारणों में गिना जा रहा है।
सीनेट में भी होगी अग्निपरीक्षा
प्रतिनिधि सभा से मंजूरी मिलने के बाद अब यह प्रस्ताव सीनेट की प्रक्रिया से गुजरेगा। इससे पहले सीनेट में भी कुछ रिपब्लिकन सांसदों ने ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान को सीमित करने के पक्ष में रुख दिखाया था। हालांकि अंतिम मतदान अभी होना बाकी है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सीनेट में इस प्रस्ताव का भविष्य अमेरिकी विदेश नीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।
क्या अब ट्रंप ईरान पर कार्रवाई नहीं कर पाएंगे?
विशेषज्ञों के अनुसार प्रतिनिधि सभा में पारित प्रस्ताव का मतलब यह नहीं है कि राष्ट्रपति के सभी सैन्य अधिकार तत्काल समाप्त हो जाएंगे। अमेरिकी संविधान राष्ट्रपति को सेना के सर्वोच्च कमांडर के रूप में कुछ विशेष अधिकार देता है, जबकि युद्ध की औपचारिक घोषणा का अधिकार कांग्रेस के पास होता है।
युद्ध शक्ति अधिनियम के तहत किसी सैन्य अभियान को लंबे समय तक जारी रखने के लिए कांग्रेस की मंजूरी आवश्यक हो सकती है। ऐसे में यह प्रस्ताव ट्रंप प्रशासन पर राजनीतिक और संवैधानिक दबाव जरूर बढ़ाएगा, लेकिन तत्काल सैन्य कार्रवाई रोकने का कानूनी आदेश नहीं माना जाएगा।
रुबियो ने जताई चिंता
विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इस प्रस्ताव पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यदि कांग्रेस इस तरह के प्रस्तावों को मंजूरी देती है तो ईरान इसे अमेरिकी प्रशासन की कमजोरी के रूप में देख सकता है। उनके मुताबिक इससे कूटनीतिक बातचीत की स्थिति भी प्रभावित हो सकती है।
युद्धविराम के बावजूद जारी है तनाव
हालांकि अप्रैल में संघर्ष को लेकर युद्धविराम की घोषणा की गई थी, लेकिन क्षेत्रीय हालात अब भी पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बरकरार है, जबकि पश्चिम एशिया में कई मोर्चों पर अस्थिरता बनी हुई है। इसी वजह से सैन्य और कूटनीतिक गतिविधियां लगातार जारी हैं।
आगे क्या होगा?
अब सभी की निगाहें सीनेट पर टिकी हैं, जहां इस प्रस्ताव पर अंतिम फैसला होना बाकी है। यदि वहां भी इसे समर्थन मिलता है तो ट्रंप प्रशासन पर ईरान नीति को लेकर दबाव और बढ़ सकता है। हालांकि अंतिम रूप से यह मुद्दा राष्ट्रपति के संवैधानिक अधिकारों और कांग्रेस की शक्तियों के बीच संतुलन पर निर्भर करेगा।