अयोध्या: अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे की गणना व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है। गणना प्रभारी को उनके दायित्व से हटाकर नए प्रभारी की नियुक्ति की गई है। इसके साथ ही गणना कार्य में लगे कर्मचारियों के ड्रेस कोड में भी बदलाव किया गया है। पहले नीले रंग की वर्दी पहनने वाले कर्मचारी अब भगवा रंग की नई वर्दी में काम कर रहे हैं। नई व्यवस्था के साथ कर्मचारियों के लिए संशोधित दिशा-निर्देश भी जारी किए गए हैं।
चढ़ावा चोरी के बाद लागू हुआ था ड्रेस कोड
राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने से पहले गणना कार्य में लगे कर्मचारी अपनी पसंद के कपड़े पहनकर आते थे। जांच के दौरान यह सामने आया था कि कुछ कर्मचारियों ने मोजों और पैंट की जेब में रुपये छिपाकर चोरी की वारदात को अंजाम दिया था। इसके बाद विशेष जांच दल और पुलिस की जांच के आधार पर कर्मचारियों के लिए विशेष ड्रेस कोड लागू किया गया। उस समय बिना जेब वाली नीले रंग की शर्ट और पैंट निर्धारित की गई थी।
शिकायतों के बाद बदली गई वर्दी
सूत्रों के अनुसार, कर्मचारियों ने शिकायत की थी कि पहले दी गई वर्दी का कपड़ा काफी मोटा था, जिससे लंबे समय तक बैठकर काम करने में परेशानी होती थी। कर्मचारियों की इस समस्या को देखते हुए अब हल्के सूती कपड़े से बनी भगवा वर्दी लागू कर दी गई है। साथ ही कर्मचारियों को मोजे पहनने की अनुमति भी नहीं दी गई है।
नई गाइडलाइन जारी, कर्मचारियों को दी गई हिदायत
सूत्रों के मुताबिक, पूर्व और वर्तमान गणना कर्मचारियों को राम जन्मभूमि परिसर में बुलाकर नई गाइडलाइन से अवगत कराया गया। बैंक अधिकारियों की मौजूदगी में कर्मचारियों को निर्देश दिए गए कि विशेष जांच दल की रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद कोई भी कर्मचारी उस पर सार्वजनिक टिप्पणी नहीं करेगा। निर्देशों का उल्लंघन करने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
पूर्व कर्मचारियों को भुगतान और भर्ती में प्राथमिकता का आश्वासन
जानकारी के अनुसार, इस्तीफा दे चुके कर्मचारियों को उनके बकाया भुगतान का आश्वासन दिया गया है। साथ ही भविष्य में नई भर्ती होने पर उन्हें प्राथमिकता देने की बात भी कही गई है। सोमवार को गणना कार्य में केवल 12 कर्मचारी ही मौजूद रहे।
चढ़ावा चोरी जांच में क्लोन चेक की भी पड़ताल
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच के दौरान अब कथित क्लोन चेक से जुड़े पहलू की भी पड़ताल की जा रही है। पुलिस सूत्रों का दावा है कि जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि कहीं ट्रस्ट के बैंक खातों में क्लोन चेक के जरिए धन निकासी या वित्तीय अनियमितता की कोशिश तो नहीं हुई। हालांकि, पुलिस अधिकारियों ने इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
2020 में भी सामने आया था क्लोन चेक का मामला
राम मंदिर ट्रस्ट पहले भी क्लोन चेक धोखाधड़ी का सामना कर चुका है। वर्ष 2020 में फर्जी चेक के जरिए ट्रस्ट के खाते से 6 लाख रुपये की निकासी की गई थी। तीसरे चेक पर बैंक की पुष्टि प्रक्रिया के दौरान धोखाधड़ी का खुलासा हुआ, जिसके बाद पूरी राशि ट्रस्ट के खाते में वापस जमा कराई गई। घटना के बाद ट्रस्ट ने सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करते हुए चेक की बजाय आरटीजीएस समेत अन्य सुरक्षित डिजिटल भुगतान प्रणालियों को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया था।