उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय में पीएचडी एडमिशन की बड़ी बदलाव, अब केवल NET-JRF क्वालिफाइड को ही मिलेगा प्रवेश

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हल्द्वानी। उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय (UOU) ने पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया में बड़ा और अहम बदलाव किया है। अब विश्वविद्यालय में डॉक्टरेट (PhD) में दाखिला केवल उन्हीं अभ्यर्थियों को मिलेगा, जिन्होंने यूजीसी या सीएसआईआर की राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा NET, JRF या पीएचडी एलिजिबिलिटी टेस्ट क्वालिफाई किया हो। राज्य संयुक्त प्रवेश परीक्षा के माध्यम से पीएचडी में प्रवेश की व्यवस्था को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है।

यह निर्णय शुक्रवार को कुलपति प्रो. नवीन चंद्र लोहनी की अध्यक्षता में आयोजित विश्वविद्यालय की चौथी शोध परिषद (Research Council) की बैठक में लिया गया। इसी बैठक में विश्वविद्यालय की नई रिसर्च पॉलिसी पर आधारित शोध अध्यादेश-2026 को भी मंजूरी दी गई।

गुणवत्तापूर्ण शोध पर विश्वविद्यालय का फोकस

शोध निदेशक प्रो. गिरिजा पांडे ने बताया कि उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय अब उच्च गुणवत्ता वाले शोध और नवाचार को प्राथमिकता दे रहा है। इसी उद्देश्य से पीएचडी कार्यक्रम में केवल राष्ट्रीय स्तर की पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण अभ्यर्थियों को ही प्रवेश देने का फैसला किया गया है, ताकि शोध का स्तर और विश्वसनीयता मजबूत हो सके।

राज्य संयुक्त प्रवेश परीक्षा से जुड़े प्रस्ताव वापस

प्रो. पांडे ने जानकारी दी कि पूर्व में राज्य संयुक्त प्रवेश परीक्षा के तहत 41 पीएचडी सीटों का प्रस्ताव कुमाऊं विश्वविद्यालय को भेजा गया था। हालांकि, राज्य स्तरीय परीक्षा आयोजित न होने और नई नीति लागू होने के बाद इन सीटों को वापस लेते हुए प्रवेश परीक्षा आधारित एडमिशन प्रक्रिया को समाप्त कर दिया गया है।

पार्ट टाइम पीएचडी कार्यक्रम को भी मिली मंजूरी

बैठक में पार्ट टाइम पीएचडी कार्यक्रम को भी स्वीकृति दी गई है। इसके तहत केवल महाविद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों और शोध संस्थानों में कार्यरत वैज्ञानिकों को ही प्रवेश का अवसर मिलेगा। इससे कार्यरत शिक्षाविदों और वैज्ञानिकों को शोध के लिए बेहतर मंच उपलब्ध होगा।

रिसर्च पॉलिसी में डेटा प्राइवेसी और प्लेजरिज्म पर सख्ती

प्रो. गिरिजा पांडे ने बताया कि शोध की गुणवत्ता, डेटा प्राइवेसी, सर्वेक्षण के दौरान डेटा संग्रह व गोपनीयता, साहित्य चोरी (Plagiarism) समेत अन्य महत्वपूर्ण बिंदुओं पर ठोस नीति बनाने के लिए एक विशेष समिति का गठन किया गया है। इसका उद्देश्य शोध प्रक्रिया को पारदर्शी और विश्वसनीय बनाना है।

नई नीतियां विश्वविद्यालय को अनुसंधान में देंगी बढ़त

कुलपति प्रो. नवीन चंद्र लोहनी ने कहा कि शोध से जुड़ी नई नीतियां विश्वविद्यालय को अकादमिक और अनुसंधान के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक ले जाने में सहायक होंगी। बैठक में प्रो. मंजरी अग्रवाल, डॉ. एसएन ओझा, डॉ. एचसी पुरोहित, प्रो. नंदगोपाल साहू, प्रो. जयदीप शर्मा, प्रो. पीके सहगल सहित अन्य वरिष्ठ शिक्षाविद मौजूद रहे।

बैठक में लिए गए अन्य अहम निर्णय

प्राध्यापकों के लिए रिसर्च पेपर अवार्ड की शुरुआत की जाएगी।
राज्य और राष्ट्रीय स्तर से जुड़े विषयों पर लघु शोध परियोजनाओं को अनुदान दिया जाएगा।
प्रत्येक विद्याशाखा से एक शोधार्थी को पांच हजार रुपये प्रतिमाह छात्रवृत्ति प्रदान की जाएगी।
विश्वविद्यालय में रिसर्च कंसल्टेंसी पॉलिसी को लागू किया जाएगा।

 

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