ईरान-अमेरिका तनाव के बीच बड़ा दावा: ‘USS जेराल्ड फोर्ड’ पर 17 दिशाओं से मिसाइल हमला’, ट्रंप के बयान से मचा हड़कंप
वॉशिंगटन/मध्य पूर्व: ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक सनसनीखेज दावा सामने आया है। ट्रंप ने कहा है कि ईरान ने दुनिया के सबसे बड़े और अत्याधुनिक न्यूक्लियर एयरक्राफ्ट कैरियर ‘यूएसएस जेराल्ड आर. फोर्ड’ पर 17 अलग-अलग कोणों से बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया, जिससे जहाज पर मौजूद अमेरिकी सैनिकों में अफरा-तफरी मच गई और उन्हें जान बचाकर भागना पड़ा।
‘जान बचाने के लिए भागना पड़ा, नहीं तो सब खत्म हो जाता’
ट्रंप ने एक विवादित बयान में कहा, “ईरान ने दुनिया के सबसे बड़े एयरक्राफ्ट कैरियर को 17 एंगल से निशाना बनाया। हम अपनी जान बचाने के लिए भागे, नहीं तो सब खत्म हो जाता।” उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और इजरायल, ईरान के ठिकानों पर लगातार हवाई हमले कर रहे हैं। ट्रंप ने इसे अमेरिकी नौसेना के लिए बड़ा झटका बताते हुए ईरान की सैन्य क्षमता को गंभीर खतरे के तौर पर पेश किया। उनके मुताबिक, ईरानी मिसाइलों और ड्रोन ने कैरियर को चारों ओर से घेर लिया था।
पेंटागन ने किया खंडन, बताया ‘तकनीकी खराबी का मामला’
हालांकि, अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन ने ट्रंप के दावों को सिरे से खारिज किया है। पेंटागन के अनुसार, यूएसएस जेराल्ड आर. फोर्ड पर किसी तरह का बाहरी हमला नहीं हुआ। विभाग का कहना है कि जहाज के लॉन्ड्री एरिया में इलेक्ट्रिकल शॉर्ट सर्किट या यांत्रिक खराबी के चलते आग लग गई थी, जो करीब 30 घंटे तक जलती रही। इस दौरान 600 से अधिक नाविकों को अपने निर्धारित स्थान छोड़ने पड़े और दो नाविकों को मामूली चोटें आईं, जबकि कई लोगों को धुएं के असर के कारण इलाज कराना पड़ा। पेंटागन ने स्पष्ट किया कि यह घटना युद्ध से जुड़ी नहीं थी और जहाज अब भी पूरी तरह मिशन के लिए सक्षम है।
मरम्मत के लिए ग्रीस भेजा गया युद्धपोत
घटना के बाद अमेरिकी नौसेना ने इस अत्याधुनिक युद्धपोत को मरम्मत के लिए ग्रीस के क्रेटे स्थित सौदा बे नौसैनिक अड्डे पर भेज दिया है। यह कैरियर रेड सी में चल रहे ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ का अहम हिस्सा था, लेकिन फिलहाल इसे ऑपरेशन से हटाकर तकनीकी सुधार में लगाया गया है।
लंबी तैनाती और थकान पर उठे सवाल
विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय से तैनाती, क्रू मेंबर की थकान और रखरखाव से जुड़ी चुनौतियों का असर जहाज की संचालन क्षमता पर पड़ा हो सकता है। वहीं, ट्रंप प्रशासन इस पूरे मामले को हल्का मुद्दा बता रहा है, लेकिन विपक्षी नेताओं और कुछ सीनेटरों ने अमेरिकी नौसेना की तैयारियों और रणनीति पर सवाल खड़े किए हैं।
रणनीतिक दबाव में अमेरिकी सैन्य ताकत
अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच यह घटनाक्रम अमेरिकी सैन्य संसाधनों पर बढ़ते दबाव को भी उजागर करता है। करीब 13 बिलियन डॉलर की लागत से बना यह अत्याधुनिक एयरक्राफ्ट कैरियर युद्ध क्षेत्र से हटाया जाना रणनीतिक रूप से एक बड़ी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।