नई दिल्ली: दिल्ली बॉर्डर के पास पकड़े गए लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े आतंकी शब्बीर अहमद लोन से पूछताछ में सुरक्षा एजेंसियों को कई चौंकाने वाली जानकारियां मिली हैं। जांच में सामने आया है कि आरोपी ने राजधानी के प्रमुख धार्मिक स्थलों और व्यावसायिक इलाकों की रेकी कर उनके वीडियो पाकिस्तान भेजे थे।
प्रमुख धार्मिक स्थलों को बनाया था निशाना
पूछताछ में शब्बीर अहमद लोन ने खुलासा किया कि उसने कालकाजी मंदिर, लोटस टेंपल और छतरपुर मंदिर जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों की रेकी की थी। इसके अलावा उसने कनॉट प्लेस जैसे व्यस्त कारोबारी इलाके का भी वीडियो तैयार कर उसे पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स तक पहुंचाया।
पाकिस्तान से संचालित हो रहा था नेटवर्क
जांच एजेंसियों के अनुसार, लोन पाकिस्तान में बैठे लश्कर-ए-तैयबा के हैंडलर्स आसिफ डार और सुमामा बाबर के लगातार संपर्क में था। बताया जा रहा है कि यह नेटवर्क एनक्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए संचालित होता था, जहां अलग-अलग पहचान के जरिए बातचीत की जाती थी। हालांकि, एक खास मोबाइल नंबर के जरिए एजेंसियों को इस पूरे नेटवर्क तक पहुंचने में सफलता मिली।
आतंकी ट्रेनिंग और ऑपरेटिव्स से कनेक्शन
जांच में यह भी सामने आया है कि लोन को लश्कर के ऑपरेटिव अबू हुजैफा ने संगठन में शामिल कराया था। इसके बाद उसने 21 दिन का बुनियादी प्रशिक्षण ‘दौरा-ए-आम’ पूरा किया, जिसमें हथियारों और ग्रेनेड के इस्तेमाल की ट्रेनिंग दी गई। आगे चलकर उसने तीन महीने का ‘दौरा-ए-खास’ प्रशिक्षण भी लिया, जिसमें आधुनिक हथियारों, आईईडी और लाइट मशीन गन चलाने की ट्रेनिंग शामिल थी।
सूत्रों के मुताबिक, उसे मुजफ्फराबाद स्थित एक कैंप में ‘दौरा-ए-सूफा’ के तहत वैचारिक प्रशिक्षण भी दिया गया, जिसका उद्देश्य नए सदस्यों की भर्ती और कट्टरता को बढ़ावा देना था।
बांग्लादेश में बनाया था आतंकी ठिकाना
जांच एजेंसियों ने खुलासा किया है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने लोन को बांग्लादेश भेजा था, जहां उसने भारत को निशाना बनाने के लिए एक ऑपरेशनल सेल तैयार किया। मार्च 2025 में वह अपने परिवार के साथ भारत-बांग्लादेश सीमा पार कर सैदपुर इलाके में बस गया और वहीं अपना ठिकाना बना लिया।
पहचान छिपाने के लिए की शादी, युवाओं की भर्ती
पहचान छिपाने के लिए लोन ने बांग्लादेश में एक स्थानीय महिला से शादी भी की। इसके बाद उसने जम्मू-कश्मीर के बाहर के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से बांग्लादेशी और भारतीय युवाओं को अपने नेटवर्क में शामिल करना शुरू किया, ताकि भारत के विभिन्न हिस्सों में आतंकी गतिविधियों को अंजाम दिया जा सके।
सुरक्षा एजेंसियां सतर्क, जांच जारी
फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही हैं और इससे जुड़े अन्य संदिग्धों की तलाश में जुटी हैं। माना जा रहा है कि इस खुलासे के बाद कई और अहम सुराग सामने आ सकते हैं।