ईरान युद्ध के बीच ट्रंप को बड़ा राजनीतिक झटका, अमेरिकी सीनेट में अटका 96 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का डिफेंस बिल

0 12

वॉशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को घरेलू मोर्चे पर बड़ा झटका लगा है। अमेरिकी सीनेट में ट्रंप प्रशासन की ओर से पेश किया गया करीब 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर, यानी 96 लाख करोड़ रुपये से अधिक का वार्षिक रक्षा विधेयक पारित नहीं हो सका। डेमोक्रेट सांसदों ने युद्ध को लेकर विरोध जताते हुए विधेयक को आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया।

यह विधेयक नेशनल डिफेंस ऑथराइजेशन एक्ट (NDAA) के तहत लाया गया था, जिसमें सेना के जवानों के वेतन में बढ़ोतरी और पेंटागन के खर्च में व्यापक वृद्धि जैसे कई प्रावधान शामिल थे।

डेमोक्रेट्स ने युद्ध का हवाला देकर किया विरोध

सीनेट में डेमोक्रेट सांसदों ने स्पष्ट किया कि ईरान के साथ जारी सैन्य संघर्ष के बीच वे इस रक्षा विधेयक का समर्थन नहीं कर सकते। उनका कहना था कि मौजूदा परिस्थितियों में सरकार की सैन्य नीति पर सवाल उठ रहे हैं और ऐसे समय में रक्षा खर्च बढ़ाने वाले विधेयक को मंजूरी देना उचित नहीं होगा।

50-46 के मतदान में बहुमत से चूका बिल

सीनेट में हुए मतदान में विधेयक के पक्ष में 50 और विरोध में 46 वोट पड़े। हालांकि, आवश्यक बहुमत नहीं मिलने के कारण यह विधेयक पारित नहीं हो सका।

डेमोक्रेट नेता चक शूमर ने मतदान से पहले कहा कि वह और उनकी पार्टी इस वार्षिक रक्षा विधेयक का समर्थन नहीं कर सकते, क्योंकि ईरान के साथ युद्ध पांचवें महीने में भी जारी है।

चक शूमर ने ट्रंप सरकार पर साधा निशाना

चक शूमर ने कहा कि नेशनल डिफेंस ऑथराइजेशन एक्ट को ईरान में दिखाई दे रही लापरवाही के लिए अनुमति पत्र नहीं बनाया जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अमेरिकी जनता को ऐसे युद्ध में और गहराई तक नहीं धकेल सकते, जिसे लेकर सरकार स्पष्ट रणनीति नहीं बता पा रही है और जिसका अंत कैसे होगा, इसका भी जवाब नहीं है।

युद्ध के बीच बढ़ा राजनीतिक दबाव

यह मतदान ऐसे समय हुआ जब व्हाइट हाउस ने कांग्रेस को औपचारिक रूप से सूचित किया था कि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ एक बार फिर बमबारी शुरू कर दी है। इसके साथ ही दोनों देशों के बीच लागू युद्धविराम समाप्त हो गया। बताया गया कि ओवल ऑफिस में हुई गोपनीय ब्रीफिंग के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने युद्धविराम पर अपना फैसला बदल दिया।

ईरान के साथ जारी संघर्ष का असर अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई दे रहा है। ऊर्जा बाजार में अस्थिरता, गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव और आर्थिक अनिश्चितता के बीच आगामी मिड-टर्म चुनाव से पहले ट्रंप प्रशासन पर राजनीतिक दबाव बढ़ता नजर आ रहा है।

 

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया Vnation के Facebook पेज को LikeTwitter पर Follow करना न भूलें...
Leave A Reply

Your email address will not be published.