ग्रेटर नोएडा में ऑटिज्म पीड़ित बच्चों के लिए बड़ी राहत, जिम्स में होगा इलाज, जरूरतमंदों को मिलेगा मुफ्त ट्रीटमेंट
ग्रेटर नोएडा। ऑटिज्म से जूझ रहे बच्चों और उनके अभिभावकों के लिए राहत भरी खबर है। कासना स्थित राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) में अब ऑटिज्म से ग्रस्त बच्चों की स्क्रीनिंग और इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इसके लिए जिम्स एक एनजीओ के सहयोग से विशेष योजना पर काम कर रहा है, जिसके तहत निजी अस्पतालों की तुलना में बेहद कम खर्च में उपचार होगा, जबकि जरूरतमंद बच्चों को निशुल्क इलाज की सुविधा दी जाएगी।
जिम्स में बने विशेष थेरेपी रूम
ऑटिज्म और स्पेशल चाइल्ड के बेहतर इलाज के लिए जिम्स में विशेष थेरेपी रूम तैयार किया गया है। यहां बच्चों को स्पीच थेरेपी, मेंटल हेल्थ से जुड़ी विभिन्न थेरेपी और जरूरी काउंसलिंग दी जाएगी। संस्थान का उद्देश्य शुरुआती चरण में बीमारी की पहचान कर बच्चों को बेहतर जीवन की दिशा देना है।
समय पर पहचान से संभव है बेहतर इलाज
जिम्स के डायरेक्टर ब्रिगेडियर डॉ. आरके गुप्ता ने बताया कि ऑटिज्म बच्चों में तेजी से बढ़ती समस्या बन रही है। कई मामलों में 12 महीने की उम्र से ही इसके लक्षण दिखने लगते हैं। ऐसे में अभिभावकों को बच्चों के व्यवहार पर नजर रखने और समय रहते डॉक्टर से संपर्क करने की सलाह दी गई है। इलाज और स्क्रीनिंग की जिम्मेदारी पीडियाट्रिक विभाग की विशेषज्ञ टीम को सौंपी गई है।

चार जिलों में अभियान, 44 बच्चे पाए गए ऑटिज्म से प्रभावित
जिम्स की डीन अकादमिक डॉ. रंभा पाठक ने बताया कि आईसीएमआर के सहयोग से तीन साल तक गौतमबुद्ध नगर, हापुड़, गाजियाबाद और मेरठ में विशेष अभियान चलाया गया था। इस दौरान 44 बच्चे ऑटिज्म से प्रभावित पाए गए, जिनमें से कई हाई रिस्क श्रेणी में हैं।
दिमाग और व्यवहार को प्रभावित करता है ऑटिज्म
ऑटिज्म एक न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है, जो बच्चों के दिमागी विकास को प्रभावित करता है। इससे पीड़ित बच्चों में बातचीत करने में कठिनाई, भावनाओं को समझने में परेशानी, देर से बोलना, एक ही शब्द बार-बार दोहराना, बुलाने पर प्रतिक्रिया न देना और अकेले रहना जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं। समय पर इलाज न होने पर इसका असर मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा पड़ सकता है।