एविएशन सेक्टर को बड़ी राहत: सरकार ने खोला ₹5,000 करोड़ का इमरजेंसी पैकेज, एयरलाइंस को संकट से उबरने की उम्मीद

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नई दिल्ली: बढ़ते जेट फ्यूल के दाम, वैश्विक तनाव और घटती यात्रियों की संख्या के बीच भारत की एविएशन इंडस्ट्री पर गहराता आर्थिक दबाव अब सरकार की बड़ी राहत के साथ कुछ हद तक कम हो सकता है। केंद्र सरकार ने एयरलाइंस कंपनियों के लिए ₹5,000 करोड़ का इमरजेंसी क्रेडिट पैकेज मंजूर किया है, जिससे संकट से जूझ रही कंपनियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

ECLGS स्कीम के तहत मिलेगा लोन, सरकार देगी गारंटी
सरकार ने यह राहत इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम (ECLGS) के तहत दी है। इसके अंतर्गत एयरलाइंस को बैंक से लोन मिलेगा और उस पर सरकार गारंटी देगी।
प्रावधान के अनुसार, हर एयरलाइन को अधिकतम ₹1,500 करोड़ तक का लोन मिल सकता है, जिससे वे अपने संचालन खर्च और वित्तीय दबाव को संभाल सकेंगी।

जेट फ्यूल बना सबसे बड़ी चुनौती, खर्च में भारी उछाल
एविएशन सेक्टर की सबसे बड़ी लागत जेट फ्यूल है, जो आमतौर पर कुल खर्च का 30 से 40 प्रतिशत होता है। लेकिन हाल के समय में यह बढ़कर करीब 50 प्रतिशत तक पहुंच गया है।
वेस्ट एशिया में तनाव, एयरस्पेस प्रतिबंध और लंबी उड़ानों के कारण एयरलाइंस के परिचालन खर्च में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

यात्रियों की संख्या में गिरावट, कमाई पर असर
सिर्फ खर्च ही नहीं, एयरलाइंस को यात्रियों की संख्या में भी कमी का सामना करना पड़ रहा है। वित्त वर्ष 2026 में घरेलू हवाई यात्रा की वृद्धि घटकर करीब 1.3 प्रतिशत रह गई है, जो पहले 7 प्रतिशत से अधिक थी।
इस गिरावट का सीधा असर एयरलाइंस की आमदनी पर पड़ रहा है।

कैसे काम करेगा यह राहत पैकेज?
सरकार की इस योजना के तहत एयरलाइंस को 7 साल तक लोन चुकाने की सुविधा दी जाएगी।
पहले 2 साल तक EMI भुगतान की आवश्यकता नहीं होगी और अतिरिक्त लोन पर सरकार की गारंटी लागू रहेगी। इस व्यवस्था से कंपनियों को तत्काल नकदी संकट से राहत मिलेगी।

क्या यात्रियों को मिलेगा सस्ते टिकट का फायदा?
फिलहाल एयरलाइंस ने बढ़ते खर्च के चलते टिकटों की कीमतों में बढ़ोतरी और फ्यूल सरचार्ज लागू किया हुआ है। विशेषज्ञों के अनुसार यह राहत पैकेज कंपनियों को वित्तीय स्थिरता तो देगा, लेकिन टिकटों के दाम तुरंत कम होने की संभावना कम है।
हालांकि, यदि आने वाले समय में ईंधन की कीमतें और वैश्विक हालात स्थिर होते हैं, तो किराए में राहत मिल सकती है।

एयरलाइंस ने पहले ही जताई थी मदद की जरूरत
एविएशन कंपनियों ने पहले ही सरकार से राहत की मांग की थी, क्योंकि कई कंपनियां ऐसी स्थिति में पहुंच गई थीं जहां अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर असर पड़ने की आशंका थी।
फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस के जरिए यह मुद्दा सरकार तक पहुंचाया गया था।

 

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