भारत-चीन रिश्तों पर बड़ा बयान: ‘अलग नहीं हो सकते पड़ोसी’, 76 साल पूरे होने पर बीजिंग का सॉफ्ट संदेश

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भारत और China के बीच कूटनीतिक संबंधों के 76 वर्ष पूरे होने के मौके पर रिश्तों को लेकर सकारात्मक संकेत सामने आए हैं। इस अवसर पर भारत में चीन के राजदूत Xu Feihong ने कहा कि दोनों देश ऐसे पड़ोसी हैं जिन्हें अलग नहीं किया जा सकता और आपसी हित इसी में हैं कि वे सहयोग और साझेदारी के रास्ते पर आगे बढ़ें।

‘ड्रैगन-एलीफेंट टैंगो’ की सोच पर जोर

राजदूत Xu Feihong ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने संदेश में कहा कि भारत और चीन को “अच्छे पड़ोसी, भरोसेमंद दोस्त और एक-दूसरे की सफलता में भागीदार” बनना चाहिए। उन्होंने ‘ड्रैगन-एलीफेंट टैंगो’ की अवधारणा का जिक्र करते हुए रणनीतिक तालमेल बढ़ाने, विभिन्न क्षेत्रों में व्यावहारिक सहयोग गहरा करने और लोगों के बीच संपर्क मजबूत करने पर बल दिया। साथ ही उन्होंने कहा कि ग्लोबल साउथ के हितों को आगे बढ़ाने के लिए बहुपक्षीय मंचों पर दोनों देशों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है।

नेताओं की मुलाकातों से रिश्तों में सुधार के संकेत

इससे पहले मुंबई में चीन के कोंसुल जनरल Qin Jie ने भी भारत-चीन संबंधों को लेकर आशावाद जताया था। उन्होंने प्रधानमंत्री Narendra Modi और चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping की हालिया मुलाकातों का जिक्र करते हुए कहा कि पिछले दो वर्षों में दोनों नेताओं की दो बार बैठक हुई है और रिश्ते सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। उनके मुताबिक, यह रुझान दोनों देशों के नागरिकों के साथ-साथ वैश्विक स्थिरता के लिए भी सकारात्मक संकेत है।

BRICS शिखर सम्मेलन को बताया अहम अवसर

Qin Jie ने इस साल भारत में होने वाले BRICS Summit को भी अहम मंच बताया। उनका कहना है कि इस सम्मेलन से दोनों देशों के बीच सहयोग और संवाद को नई गति मिल सकती है, जिससे द्विपक्षीय संबंध और मजबूत होंगे।

कूटनीतिक रणनीति के संकेत भी स्पष्ट

विशेषज्ञों के मुताबिक, चीन का यह नरम रुख एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। सीमा विवाद के चलते लंबे समय से दोनों देशों के रिश्तों में तनाव बना हुआ है, ऐसे में बीजिंग बातचीत और स्थिरता की दिशा में माहौल बनाने की कोशिश कर रहा है। इसके साथ ही वैश्विक राजनीति में अमेरिका और पश्चिमी देशों के बढ़ते प्रभाव के बीच चीन चाहता है कि भारत संतुलित रुख अपनाए और पूरी तरह पश्चिमी खेमे की ओर न झुके।

तनाव के बीच सहयोग की नई कोशिश

कुल मिलाकर, Xi Jinping के नेतृत्व में चीन टकराव को कम करते हुए अपने रणनीतिक हितों को सुरक्षित करने और क्षेत्रीय स्थिरता का संदेश देने की दिशा में आगे बढ़ता दिख रहा है। भारत-चीन संबंधों में यह नरमी आने वाले समय में द्विपक्षीय और वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण असर डाल सकती है।

 

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