छत्तीसगढ़ में माओवादी हिंसा पर बड़ी कामयाबी, 108 हथियारबंद माओवादी ने किया आत्मसमर्पण; करोड़ों की नकदी और सोना बरामद
नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में बुधवार को ‘पूना मारगेम-पुनर्वास से पुनर्जीवन’ पहल के तहत 108 माओवादी हिंसक संगठन के सदस्य मुख्यधारा में लौट आए। जगदलपुर के शौर्य भवन में आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों में कई वरिष्ठ नेता शामिल थे। आदिवासी समाज ने संविधान की किताब और गुलाब के फूल देकर उनका स्वागत किया और सम्मानित किया।
माओवादियों का सफाया और डीजीपी का दावा
छत्तीसगढ़ पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) अरुण देव गौतम और बस्तर आईजी सुंदरराज पी. की मौजूदगी में आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों के पास से कुल 3.29 करोड़ रुपये मूल्य के इनामी हथियार बरामद किए गए। इसमें 44 महिला माओवादियों भी शामिल थीं। डीजीपी ने कहा कि मार्च 2026 तक प्रदेश से माओवादियों का सफाया कर दिया जाएगा।
आईजी सुंदरराज ने शेष बचे माओवादियों से अपील की कि वे भी हिंसा छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटें। सरकार उनके सुरक्षा, कौशल विकास, शिक्षा और सम्मानजनक जीवन के लिए प्रतिबद्ध है।
इतिहास में पहली बार एक ही स्थान से बड़ी बरामदगी
मालूम हो कि पिछले 26 महीनों में छत्तीसगढ़ में कुल 2,822 माओवादियों ने हिंसा का रास्ता छोड़ा, जिनमें 2,733 केवल बस्तर संभाग के थे। माओवादी विरोधी अभियान के इतिहास में पहली बार एक ही स्थान से 3.61 करोड़ रुपये नकद और 1.64 करोड़ रुपये मूल्य का एक किलोग्राम सोना बरामद हुआ।
हथियारों की बड़ी बरामदगी
आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों के पास कुल 101 घातक हथियार बरामद हुए, जिनमें सात एके-47 राइफल, 10 इंसास राइफलें, चार लाइट मशीन गन (एलएमजी), 11 बीजीएल (बैरल ग्रेनेड लांचर) और 20 नग 303 राइफल शामिल हैं।
सीनियर माओवादी नेताओं का समर्पण
आत्मसमर्पित माओवादियों में बस्तर के डिविजनल कमेटी सदस्य राहूल तेलाम, पण्डरु कोवासी, झितरु ओयाम और उत्तर बस्तर के डिवीसीएम मल्लेश, डीवीसीएम कोसा मंडावी, साथ ही पीएलजीए बटालियन नंबर-एक के कमांडर मुचाकी शामिल हैं। उनके शामिल होने से यह आत्मसमर्पण न केवल संख्या में बड़ा है, बल्कि माओवादी नेतृत्व में ऐतिहासिक बदलाव का संकेत भी देता है।