लोकसभा में 4 अहम बिलों पर मंथन, सरकार ने तय किया चर्चा का समय; जानिए किस विधेयक पर कितनी होगी बहस

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लोकसभा के बजट सत्र का दूसरा चरण जारी है और इसी दौरान केंद्र सरकार चार महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा कराने जा रही है। यह बजट सत्र 28 जनवरी से शुरू होकर 2 अप्रैल तक चलना तय है। पहले चरण की कार्यवाही 28 जनवरी से 13 फरवरी तक चली थी, जबकि दूसरा चरण 9 मार्च से शुरू होकर अब अंतिम दौर में पहुंच रहा है। इसी चरण में इन चारों बिलों पर विस्तृत चर्चा की रूपरेखा तैयार कर ली गई है।

लोकसभा की बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक में इन विधेयकों पर चर्चा के लिए समय भी निर्धारित कर दिया गया है, जिससे यह साफ हो गया है कि किस बिल पर कितनी देर तक सदन में बहस होगी।

इन 4 विधेयकों पर होगी चर्चा

सरकार जिन चार विधेयकों को सदन में चर्चा के लिए ला रही है, उनमें सबसे पहला ट्रांसजेंडर पर्सन्स अमेंडमेंट बिल 2026 है। इस बिल पर चर्चा के लिए 3 घंटे का समय तय किया गया है। प्रस्तावित संशोधन के तहत ट्रांसजेंडर की परिभाषा को सीमित करने की बात कही गई है, जिसमें स्व-पहचान के आधार पर ट्रांसजेंडर माने जाने वाले लोगों को शामिल नहीं किया गया है। इसके साथ ही 2019 के कानून के अनुच्छेद 4(2) को हटाने का प्रस्ताव भी इसमें शामिल है।

दूसरा अहम विधेयक केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल यानी CAPF से जुड़ा है। इस बिल पर 6 घंटे तक चर्चा होगी। इस विधेयक का उद्देश्य बीएसएफ, सीआरपीएफ, आईटीबीपी और सीआईएसएफ जैसे बलों में आईजी और उससे ऊपर के पदों पर नियुक्ति, प्रतिनियुक्ति, पदोन्नति और सेवा शर्तों को स्पष्ट करना है।

तीसरा विधेयक इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड संशोधन बिल है, जिस पर 4 घंटे चर्चा का समय निर्धारित किया गया है। यह बिल दिवालियापन से जुड़े मौजूदा कानून में संशोधन से संबंधित है।

वहीं चौथा विधेयक एफसीआरए संशोधन बिल 2026 है। इस पर 3 घंटे चर्चा होगी। एफसीआरए यानी फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट से जुड़े इस संशोधन का संबंध विदेशी अंशदान के नियमन से है।

क्या है बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (BAC)?

लोकसभा की कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाने में बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की अहम भूमिका होती है। यह सांसदों का एक पैनल होता है, जिसे संसद के कामकाज को व्यवस्थित करने के लिए चुना जाता है। यही समिति तय करती है कि किसी विधेयक या अन्य सरकारी कामकाज पर सदन में कितनी अवधि तक चर्चा होगी। कमेटी आमतौर पर उन्हीं विधेयकों पर विचार करती है, जिन्हें सभापति की ओर से उसके पास भेजा जाता है।

 

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