उत्तर प्रदेश में ट्रैफिक नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ अब सख्त कार्रवाई तय मानी जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में ‘उप्र दंड विधि (अपराधों का शमन और निवारणों का उपशमन) (संशोधन) अध्यादेश-2026’ को मंजूरी दे दी गई है। इस फैसले के बाद अब ट्रैफिक नियम तोड़ने वाले मामलों में समय बीतने के साथ राहत मिलने की पुरानी व्यवस्था खत्म हो जाएगी।
पुरानी व्यवस्था खत्म, अब नहीं मिलेगा समय का सहारा
अब तक प्रदेश में 1979 से लागू व्यवस्था के तहत मोटर वाहन अधिनियम के उल्लंघन के मामलों में अगर चालान नहीं भरा जाता था, तो तय समय के बाद लोक अदालत के जरिए मामले स्वतः समाप्त हो जाते थे। कई वाहन चालक इसी का फायदा उठाकर चालान लंबित रखते थे। नए संशोधन के बाद यह व्यवस्था पूरी तरह समाप्त कर दी गई है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद लिया गया फैसला
राज्य सरकार ने यह सख्त कदम सुप्रीम कोर्ट के 20 नवंबर 2025 के आदेश के अनुपालन में उठाया है। नए अध्यादेश के तहत अब गंभीर श्रेणी के ट्रैफिक उल्लंघन के मामले समय के आधार पर खत्म नहीं होंगे। राज्यपाल की मंजूरी के बाद यह कानून पूरे प्रदेश में लागू हो जाएगा।
इन मामलों में नहीं मिलेगी कोई राहत
संशोधित कानून के अनुसार अब तीन तरह के मामलों में कोई ढील नहीं दी जाएगी। बार-बार नियम तोड़ने वाले चालकों के सभी पुराने मामले लंबित रहेंगे। जिन मामलों में अनिवार्य रूप से जेल की सजा का प्रावधान है, वे समय के साथ खत्म नहीं होंगे। इसके अलावा गैर-शमनीय अपराधों में भी अदालत की प्रक्रिया जारी रहेगी और समझौते की गुंजाइश नहीं होगी।
सरकार का फोकस—सुरक्षित और अनुशासित यातायात
सरकार का मानना है कि इस सख्ती से नियमों को हल्के में लेने वाले वाहन चालकों में डर पैदा होगा। अब लंबित चालान होने पर वाहन से जुड़े जरूरी काम जैसे फिटनेस, एनओसी और अन्य प्रक्रियाएं भी प्रभावित होंगी।
गृह विभाग के मुताबिक इस कदम का मुख्य उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाना और लोगों को यातायात नियमों के प्रति अधिक जिम्मेदार बनाना है। अब ‘चालान न भरने’ की रणनीति काम नहीं करेगी और नियम तोड़ने वालों को हर हाल में जवाबदेह होना पड़ेगा।