ग्रेटर नोएडा में अवैध निर्माण पर चला बुलडोजर, हिंडन डूब क्षेत्र में बनी कॉलोनी ध्वस्त, प्राधिकरण की सख्त चेतावनी
नोएडा: ग्रेटर नोएडा में अवैध निर्माण के खिलाफ प्राधिकरण ने बड़ी कार्रवाई करते हुए बुलडोजर चला दिया। बुधवार को हैबतपुर क्षेत्र में हिंडन नदी के डूब क्षेत्र में बनाए गए करीब 6 हजार वर्ग मीटर के अवैध निर्माण को ध्वस्त कर दिया गया। यह कार्रवाई ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के परियोजना और भूलेख विभाग की संयुक्त टीम ने की। मौके पर प्राधिकरण पुलिस भी तैनात रही।
डूब क्षेत्र में कॉलोनी बसाने की साजिश नाकाम
प्राधिकरण के मुताबिक कॉलोनाइजर इस क्षेत्र में अवैध प्लॉटिंग कर कॉलोनी बसाने की तैयारी में थे। हैबतपुर के खसरा संख्या 280 और 287 की यह भूमि हिंडन नदी के डूब क्षेत्र में आती है और प्राधिकरण के अधिसूचित क्षेत्र में स्थित है। बिना किसी अनुमति और स्वीकृत नक्शे के यहां निर्माण कराया जा रहा था।
एनजीटी के आदेशों के तहत लगातार कार्रवाई
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी (एसीईओ) सुमित यादव ने बताया कि हिंडन डूब क्षेत्र में अतिक्रमण रोकने के लिए राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के स्पष्ट निर्देश हैं। इन्हीं आदेशों के अनुपालन में प्राधिकरण द्वारा अवैध निर्माणों के खिलाफ लगातार सख्त कदम उठाए जा रहे हैं।
बिना नक्शा पास कराए निर्माण पर नहीं बख्शा जाएगा
एसीईओ ने चेतावनी दी कि अधिसूचित क्षेत्र में बिना अनुमति या बिना नक्शा पास कराए किए गए किसी भी निर्माण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्राधिकरण की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कठोर कदम उठाए जाएंगे।
घर या जमीन खरीदने से पहले जरूर करें जांच
प्राधिकरण ने आम लोगों से अपील की है कि ग्रेटर नोएडा में कहीं भी जमीन या मकान खरीदने से पहले भूलेख विभाग से पूरी जानकारी जरूर लें। अवैध कॉलोनियों में निवेश कर लोग अपनी मेहनत की कमाई जोखिम में न डालें।
दो घंटे चली ध्वस्तीकरण कार्रवाई
इस कार्रवाई को परियोजना विभाग के वर्क सर्किल-3 की टीम ने अंजाम दिया। प्रभारी राजेश कुमार निम, प्रबंधक रोहित गुप्ता सहित टीम ने करीब दो घंटे में पूरे अवैध निर्माण को ध्वस्त कर दिया।
पहले भी दी गई थी चेतावनी
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के महाप्रबंधक परियोजना ए.के. सिंह ने बताया कि अवैध निर्माण को पहले कई बार रुकवाया गया था, लेकिन इसके बावजूद निर्माण कार्य जारी रखा गया। नियमों की अनदेखी के चलते आखिरकार ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करनी पड़ी।