दिल्ली में मार्च का बदला मिजाज: 6 पश्चिमी विक्षोभ, बढ़ा प्रदूषण, गर्मी और बारिश—एक साथ टूटे कई रिकॉर्ड
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में इस बार मार्च का महीना मौसम के लिहाज से बेहद असामान्य रहा। कभी बारिश, कभी तेज गर्मी और पूरे महीने ऊंचा प्रदूषण स्तर—इन सबके बीच मार्च 2026 ने कई पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए। यह महीना बीते चार वर्षों में सबसे अधिक प्रदूषित, तीन साल में सबसे ज्यादा बारिश वाला और हाल के वर्षों में सबसे गर्म महीनों में दर्ज किया गया।
चार साल में सबसे प्रदूषित रहा मार्च
सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर के विश्लेषण के मुताबिक, 30 मार्च तक दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक 181 दर्ज किया गया, जो 2022 के बाद सबसे अधिक है। इससे पहले 2022 में यह 217 था, जबकि 2023 में 170, 2024 में 176 और 2025 में 170 दर्ज किया गया था।
पूरे महीने के दौरान केवल एक दिन वायु गुणवत्ता ‘संतोषजनक’ श्रेणी में रही, 22 दिन ‘मध्यम’ और 8 दिन ‘खराब’ श्रेणी में दर्ज किए गए।
मार्च में भी बढ़ी गर्मी, तापमान ने किया चौंकाया
मौसम के लिहाज से भी मार्च 2026 काफी गर्म रहा। औसत अधिकतम तापमान 32.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो पिछले चार वर्षों में सबसे ज्यादा है। हालांकि 2022 में यह 33.4 डिग्री सेल्सियस रहा था, लेकिन हाल के वर्षों में यह मार्च का सबसे गर्म दौर माना जा रहा है।
बारिश ने भी बनाया रिकॉर्ड
इस बार मार्च में बारिश ने भी जोरदार उपस्थिति दर्ज कराई। 2026 में कुल 19.82 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई, जो 2023 के बाद इस महीने के लिए सबसे अधिक है। हालांकि 2023 में 50.4 मिलीमीटर बारिश हुई थी, लेकिन 2024 और 2025 की तुलना में इस बार अधिक वर्षा दर्ज की गई।
6 पश्चिमी विक्षोभ से बदला मौसम
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, 11 से 31 मार्च के बीच कुल 6 पश्चिमी विक्षोभों ने उत्तर-पश्चिम भारत को प्रभावित किया। इनकी वजह से दिल्ली समेत आसपास के क्षेत्रों में आंधी-तूफान और बारिश देखने को मिली, जिससे मौसम बार-बार बदलता रहा।
प्रदूषण के बदलते पैटर्न पर चिंता
विशेषज्ञों ने इस दौरान प्रदूषण के स्वरूप में आए बदलाव पर भी चिंता जताई है। विश्लेषकों के अनुसार, इस बार गैसीय प्रदूषकों की भूमिका ज्यादा अहम रही। ओजोन, कार्बन मोनोऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड जैसे तत्वों के बढ़ते स्तर से निपटना अब और जरूरी हो गया है।