मोबाइल की गिरफ्त में बच्चे, ऑनलाइन गेम बन रहे खतरा, मोबाइल फोबिया से बचाने की जिम्मेदारी अभिभावकों पर

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बांका। मोबाइल तकनीक ने जहां जीवन को आसान बनाया है, वहीं इसका जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल अब बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक हालात चिंताजनक हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार करीब 40 प्रतिशत बच्चे मोबाइल फोबिया की चपेट में आ चुके हैं। स्थिति यह है कि बच्चे खाने, सोने और पढ़ाई के दौरान भी मोबाइल से खुद को अलग नहीं कर पा रहे हैं।

पढ़ाई, खेलकूद और सामाजिक गतिविधियों की जगह अब मोबाइल और ऑनलाइन गेम ने ले ली है। खास तौर पर चाइनीज ऑनलाइन गेम बच्चों का कीमती समय निगल रहे हैं, जिससे उनका शारीरिक और मानसिक विकास प्रभावित हो रहा है।

मोबाइल गेम से जुड़े मामलों ने बढ़ाई चिंता

हाल के दिनों में मोबाइल गेम से जुड़े कई दुखद मामलों ने समाज को झकझोर कर रख दिया है। इसके बावजूद अभिभावकों की लापरवाही और बच्चों पर सही निगरानी के अभाव में समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। हालात ऐसे हैं कि बच्चों की बदली हुई आदतों और व्यवहार से परेशान माता-पिता सदर अस्पताल पहुंच रहे हैं।

यहां नैदानिक मनोवैज्ञानिक डॉ. एमयू फारूक मोबाइल की लत से जूझ रहे बच्चों की काउंसिलिंग कर रहे हैं और उन्हें इस आदत से बाहर निकालने का प्रयास कर रहे हैं।

मां की भूमिका सबसे अहम

डॉ. एमयू फारूक का कहना है कि बच्चे घर में सबसे ज्यादा समय मां के साथ बिताते हैं। लेकिन वर्तमान दौर में महिलाएं भी मोबाइल में अधिक व्यस्त रहती हैं। इससे बच्चे खुद को उपेक्षित और अकेला महसूस करने लगते हैं और धीरे-धीरे मोबाइल को ही अपना साथी बना लेते हैं।

उन्होंने कहा कि माताओं को चाहिए कि वे मोबाइल से दूरी बनाकर बच्चों के साथ समय बिताएं, उनसे खुलकर बातचीत करें और उनकी पसंद-नापसंद को समझें। पढ़ाई और दिनचर्या को लेकर संवाद बढ़ाना बेहद जरूरी है, ताकि बच्चे भावनात्मक रूप से सुरक्षित महसूस कर सकें।

अभिभावकों की आदतें भी बनती हैं वजह

चिकित्सकों का कहना है कि यदि माता-पिता खुद हर समय मोबाइल में व्यस्त रहेंगे तो बच्चों को रोक पाना मुश्किल होगा। घर में माता-पिता की मौजूदगी के दौरान मोबाइल का सीमित उपयोग होना चाहिए। बच्चों के साथ खेलना, बातचीत करना और रचनात्मक गतिविधियों में समय देना उनके आत्मविश्वास को बढ़ाता है और मोबाइल से दूरी बनाने में मदद करता है।

मानसिक बीमारियों का बढ़ता खतरा

विशेषज्ञों के अनुसार अत्यधिक मोबाइल उपयोग बच्चों को मानसिक बीमारियों की ओर धकेल सकता है। डॉ. फारूक ने बताया कि मोबाइल की लत के कारण बच्चों में चिड़चिड़ापन, एकाग्रता की कमी, अवसाद और आक्रामक व्यवहार जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं।

यदि समय रहते इस पर नियंत्रण नहीं किया गया तो बच्चे गंभीर मानसिक आघात के शिकार हो सकते हैं और गलत कदम उठाने की आशंका भी बढ़ जाती है। ऐसे में अभिभावकों को सतर्क रहते हुए बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए अभी से ठोस कदम उठाने की जरूरत है।

 

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