150 करोड़ से बड़ी परियोजनाओं को सीएम की मंजूरी, शहरी पुनर्विकास नीति में बड़े बदलाव; निवेश और हाउसिंग को मिलेगी रफ्तार

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लखनऊ: उत्तर प्रदेश में बड़ी परियोजनाओं की मंजूरी प्रक्रिया को सरल और तेज करने के लिए मुख्यमंत्री ने अहम निर्देश जारी किए हैं। नई व्यवस्था के तहत अब 150 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली परियोजनाओं को मुख्यमंत्री स्तर से मंजूरी दी जाएगी। वहीं, शहरी पुनर्विकास नीति में भी कई बड़े बदलाव किए गए हैं, जिससे शहरों में आवास, व्यावसायिक सुविधाओं और निवेश को बढ़ावा मिलेगा।

परियोजनाओं की मंजूरी सीमा में बड़ा बदलाव

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि अब विभागीय मंत्री स्तर से मिलने वाली स्वीकृति की सीमा 10 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 50 करोड़ रुपये कर दी जाए। 50 करोड़ से 150 करोड़ रुपये तक की परियोजनाओं को वित्त मंत्री स्तर से मंजूरी मिलेगी, जबकि 150 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली परियोजनाओं को मुख्यमंत्री स्तर से स्वीकृति दी जाएगी। इसके साथ ही केंद्र सरकार की तर्ज पर उत्तर प्रदेश में ‘स्टेट गारंटी पॉलिसी’ लागू करने के भी निर्देश दिए गए हैं।

वार्षिक कार्ययोजना और लागत बढ़ोतरी पर सख्ती

मुख्यमंत्री ने समीक्षा बैठक के दौरान सभी विभागों को निर्देश दिया कि वे अपनी वार्षिक कार्ययोजना 15 अप्रैल तक मंजूर करा लें। इसके अलावा किसी भी परियोजना की लागत में यदि 15 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी होती है, तो विभाग को कारण स्पष्ट करते हुए दोबारा अनुमोदन लेना अनिवार्य होगा।

पुराने भवनों के पुनर्विकास को मिलेगी राहत

शहरी पुनर्विकास नीति के तहत राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए पुराने भवनों और वर्षों से बंद पड़े औद्योगिक भवनों को तोड़कर पुनर्निर्माण की सुविधा दी है। इसके अंतर्गत आवासीय निर्माण के साथ 10 प्रतिशत तक व्यावसायिक निर्माण की अनुमति दी जाएगी। इससे अपार्टमेंट और सोसायटी में रहने वाले लोगों को आसपास ही दुकानें और अन्य सुविधाएं मिल सकेंगी। साथ ही अफोर्डेबल हाउसिंग योजना के तहत फ्लैट निर्माण पर विभिन्न शुल्कों में छूट देने का भी प्रावधान किया गया है।

शहरों में भूमि की कमी बनी बड़ी चुनौती

लखनऊ, कानपुर, गाजियाबाद, अयोध्या, वाराणसी, मथुरा-वृंदावन, बरेली, मेरठ, झांसी, मुरादाबाद, प्रयागराज और गौतमबुद्धनगर जैसे प्रमुख शहरों में तेजी से बढ़ती आबादी के चलते भूमि की कमी गंभीर समस्या बन गई है। हालांकि शहरों के बीचोंबीच कई पुराने या अनुपयोगी भवन और औद्योगिक परिसर ऐसे हैं, जिनका इस्तेमाल नहीं हो पा रहा। इन्हीं कारणों से राज्य सरकार ने अन्य राज्यों की तर्ज पर शहरी पुनर्विकास नीति को लागू किया है।

निवेश बढ़ाने के लिए विदेश दौरे की तैयारी

मुख्यमंत्री का 23 और 24 फरवरी को जापान तथा 25 और 26 फरवरी को सिंगापुर दौरा प्रस्तावित है। इस दौरान वे जापान और सिंगापुर की प्रतिष्ठित कंपनियों के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर उत्तर प्रदेश में निवेश के लिए आमंत्रित करेंगे। ऑटोमोबाइल, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, बायोटेक्नोलॉजी, फिनटेक, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर और डाटा सेंटर जैसे क्षेत्रों में निवेश आकर्षित करने पर विशेष फोकस रहेगा।

गुजरात और मध्य प्रदेश मॉडल से ली गई प्रेरणा

आवास विभाग ने शहरी पुनर्विकास नीति को अंतिम रूप देने से पहले देश के कई राज्यों की नीतियों का अध्ययन किया। गुजरात और मध्य प्रदेश मॉडल को आधार बनाते हुए इस नीति को तैयार किया गया है। गुजरात में 25 साल पुराने भवनों के पुनर्निर्माण की अनुमति है, इसी तर्ज पर यूपी में भी 25 वर्ष पुराने भवनों को इस नीति के दायरे में लाया गया है।

राजस्व भवनों के लिए 196.39 करोड़ रुपये स्वीकृत

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राजस्व विभाग के भवनों के निर्माण और मरम्मत कार्यों को तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए मंडल, जिला और तहसील स्तर पर कार्यालय और आवासीय भवनों के निर्माण व मरम्मत हेतु 196.39 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। सोनभद्र, गाजियाबाद, अमरोहा, सिद्धार्थनगर, जालौन, औरैया और मैनपुरी में तहसील भवनों का निर्माण कार्य जारी है, जबकि गोरखपुर, मेरठ और संभल में कलेक्ट्रेट भवनों की मरम्मत कराई जा रही है।

ऊर्जा दक्षता और ग्रीन फीचर्स को मिलेगा बढ़ावा

शहरी पुनर्विकास योजना में ऊर्जा दक्ष डिजाइन, सोलर एनर्जी और रेन वाटर हार्वेस्टिंग को प्रोत्साहित किया जाएगा। योजना को मंजूरी देने के लिए शासन स्तर पर प्रमुख सचिव आवास और स्थानीय स्तर पर विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष या आवास आयुक्त की अध्यक्षता में समिति गठित की जाएगी।

 

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