वनडे विश्व कप 2027 को लेकर चौंकाने वाले संकेत सामने आ रहे हैं। पहली बार ऐसा संभव दिख रहा है कि मेजबान देश ही टूर्नामेंट में जगह बनाने के लिए जूझता नजर आए। अभी भले ही प्रतियोगिता में समय बाकी हो, लेकिन मौजूदा हालात यह बता रहे हैं कि नामीबिया को मेजबान होने के बावजूद वर्ल्ड कप में खेलने के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ रहा है।
दक्षिण अफ्रीका और जिम्बाब्वे को सीधी एंट्री, नामीबिया अभी भी दौड़ में पीछे
2027 वनडे विश्व कप की मेजबानी दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया मिलकर करेंगे। जहां दक्षिण अफ्रीका और जिम्बाब्वे ने अपनी जगह पक्की कर ली है, वहीं नामीबिया अब तक क्वालीफिकेशन के जाल में फंसा हुआ है। इसकी वजह यह है कि दक्षिण अफ्रीका और जिम्बाब्वे आईसीसी के पूर्ण सदस्य हैं, जबकि नामीबिया एसोसिएट सदस्य होने के कारण उसे क्वालीफायर के रास्ते ही टूर्नामेंट में पहुंचना होगा।
अंक तालिका में पिछड़ने से बढ़ी मुश्किलें
नामीबिया की मौजूदा स्थिति काफी चिंताजनक है। लीग 2 की अंक तालिका में टीम छठे स्थान पर है। उसने अब तक 25 मुकाबले खेले हैं, जिनमें सिर्फ 9 में जीत मिली है, जबकि 15 मैचों में हार का सामना करना पड़ा है। टीम के पास कुल 19 अंक हैं और नेट रन रेट भी नकारात्मक है, जो उसकी स्थिति को और कमजोर बना रहा है।
टॉप-4 से दूर, प्ले-ऑफ ही आखिरी उम्मीद
अंक तालिका में अमेरिका, स्कॉटलैंड, नीदरलैंड्स और ओमान की टीमें शीर्ष चार में हैं। चौथे स्थान पर मौजूद ओमान के पास 27 अंक हैं, जो नामीबिया से काफी आगे हैं। ऐसे में नामीबिया का सीधे क्वालीफाई करना बेहद मुश्किल नजर आ रहा है। अगर टीम शीर्ष चार में जगह नहीं बना पाती है, तो उसे क्वालीफायर प्ले-ऑफ के रास्ते आखिरी मौका मिलेगा।
स्कॉटलैंड के खिलाफ मुकाबला बेहद अहम
नामीबिया के लिए हर मुकाबला अब करो या मरो जैसा हो गया है। 6 अप्रैल को टीम का सामना स्कॉटलैंड से होना है, जो उसके भविष्य के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। अगर नामीबिया यह मैच जीतती है, तो उम्मीदें जिंदा रहेंगी, लेकिन हार की स्थिति में वर्ल्ड कप से बाहर होने का खतरा और गहरा जाएगा।
इतिहास में पहली बार बन सकती है ऐसी स्थिति
अब तक वनडे विश्व कप के इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ कि कोई मेजबान देश ही टूर्नामेंट में हिस्सा न ले सके। लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए यह आशंका पहली बार वास्तविकता में बदलती दिख रही है।