लीबिया में गद्दाफी परिवार पर घातक हमला, पूर्व तानाशाह के बेटे सैफ अल-इस्लाम की घर में घुसकर गोली मारकर हत्या
नई दिल्ली: लीबिया से बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आई है. पूर्व लीबियाई तानाशाह मुअम्मर गद्दाफी के बेटे सैफ अल-इस्लाम गद्दाफी की हत्या कर दी गई है. पश्चिमी लीबिया के जिंतान शहर में स्थित उनके आवास पर हथियारबंद हमलावरों ने घुसकर उन्हें गोली मार दी. सैफ अल-इस्लाम की राजनीतिक टीम ने इस हत्या की पुष्टि करते हुए इसे लीबिया की राजनीति को झकझोर देने वाली घटना बताया है.
यह वारदात मंगलवार दोपहर उस वक्त हुई, जब चार नकाबपोश बंदूकधारी सैफ अल-इस्लाम के घर में दाखिल हुए. हमलावरों ने पहले सुरक्षा व्यवस्था को निशाना बनाते हुए निगरानी कैमरों को नष्ट किया और फिर सीधे उन पर फायरिंग कर दी, जिससे मौके पर ही उनकी मौत हो गई.
राजनीतिक टीम ने की हत्या की पुष्टि
सैफ अल-इस्लाम की राजनीतिक टीम के सदस्य अब्दुल्लाह ओथमान अब्दुर्रहीम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक के जरिए हत्या की जानकारी सार्वजनिक की. उन्होंने इस घटना को “कायरतापूर्ण और विश्वासघाती हत्या” करार दिया. टीम का कहना है कि यह हमला पूरी तरह सुनियोजित था और इसका उद्देश्य केवल एक व्यक्ति को नहीं, बल्कि एक राजनीतिक विचारधारा को खत्म करना हो सकता है.
साजिश के पीछे बड़े षड्यंत्र की आशंका
सैफ अल-इस्लाम की टीम ने लीबियाई न्यायपालिका और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस हत्या की निष्पक्ष और गहन जांच की मांग की है. टीम का कहना है कि हमलावरों की पहचान कर उन्हें सजा दी जानी चाहिए, साथ ही इस हमले की साजिश रचने वालों को भी बेनकाब किया जाए. राजनीतिक टीम का दावा है कि यह हत्या किसी बड़े षड्यंत्र का हिस्सा हो सकती है, जिसका उद्देश्य लीबिया की राजनीति में अस्थिरता पैदा करना है.
फिलहाल त्रिपोली और जिंतान की स्थानीय प्रशासनिक इकाइयों की ओर से आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है. हालांकि लीबियाई मीडिया और कई अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियों ने सैफ अल-इस्लाम की मौत की खबर की पुष्टि की है. जांच शुरुआती चरण में है और हमलावर अब तक फरार बताए जा रहे हैं.
गद्दाफी परिवार की विरासत और सैफ अल-इस्लाम की भूमिका
2011 में नाटो समर्थित विद्रोह के दौरान मुअम्मर गद्दाफी की हत्या के बाद लीबिया की राजनीति पूरी तरह बदल गई थी. उस समय सैफ अल-इस्लाम को गद्दाफी का संभावित उत्तराधिकारी माना जाता था. वे न केवल अपने पिता के सबसे प्रभावशाली बेटे थे, बल्कि लीबिया की सत्ता संरचना में भी उनकी अहम भूमिका रही थी.
विद्रोह के बाद सैफ अल-इस्लाम को जिंतान में गिरफ्तार किया गया था, जहां वे कई वर्षों तक कैद में रहे. वर्ष 2017 में उनकी रिहाई हुई, जिसके बाद वे जिंतान में ही रहने लगे. 2021 में उन्होंने लीबिया के राष्ट्रपति चुनाव में उतरने की कोशिश की थी, लेकिन राजनीतिक विवादों और कानूनी अड़चनों के चलते चुनाव प्रक्रिया ही अधर में लटक गई.
सैफ अल-इस्लाम हमेशा से लीबिया की राजनीति में एक विवादास्पद और ध्रुवीकरण करने वाली शख्सियत रहे. समर्थक उन्हें गद्दाफी युग की निरंतरता मानते थे, जबकि विरोधी उन्हें पुराने शासन का प्रतीक समझते रहे. अब उनकी हत्या ने लीबिया के भविष्य और वहां की राजनीतिक स्थिरता को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं.