दिल्ली हाई कोर्ट का निर्देश: डिजिटल स्वास्थ्य प्लेटफॉर्म से मजबूत करें राजधानी का हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर
नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने राजधानी के स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के लिए डिजिटल स्वास्थ्य प्लेटफॉर्म के पूर्ण उपयोग पर जोर दिया है। कोर्ट ने कहा कि डिजिटल सिस्टम के जरिए अस्पतालों का एकीकरण मरीजों की देखभाल में सुधार ला सकता है और आपातकालीन स्थितियों में तेजी से उपचार सुनिश्चित कर सकता है। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि अस्पतालों में बिस्तरों और अन्य चिकित्सा सुविधाओं की रियल-टाइम जानकारी उपलब्ध कराई जाए।
न्यायमूर्ति प्रतिबा एम सिंह और मनमीत प्रीतम सिंह अरोरा की पीठ ने कहा कि नेक्स्टजेन ई-हॉस्पिटल प्लेटफॉर्म में अस्पतालों के बीच मरीजों के डेटा और उपचार रिकार्ड साझा करने की सुविधा है। इससे डॉक्टर बेहतर निदान कर सकते हैं और मरीजों की निरंतर देखभाल सुनिश्चित की जा सकती है। अदालत ने यह निर्देश एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिए, जो आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं की सुलभता से संबंधित थी।
सुनवाई के दौरान, राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र ने अस्पताल प्रबंधन सूचना प्रणाली और सरकारी अस्पतालों में डिजिटल मॉड्यूल के कार्यान्वयन की प्रगति पर रिपोर्ट पेश की। पीठ ने देखा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म बाहरी मरीजों, बिलिंग, अपॉइंटमेंट सिस्टम और रोगी रिकॉर्ड के एकीकरण में सक्षम है। अदालत ने स्पष्ट किया कि प्रमुख मुद्दा दिल्ली के अस्पतालों में बेड, आईसीयू और अन्य आपातकालीन सेवाओं की रियल-टाइम उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
वर्तमान में दिल्ली के 38 अस्पताल प्लेटफॉर्म पर मौजूद हैं, लेकिन प्रवेश और डिस्चार्ज प्रक्रियाएं आंशिक रूप से मैन्युअल हैं। अदालत ने कहा कि विश्वसनीय रियल-टाइम डेटा उत्पन्न करने के लिए सिस्टम को पूरी तरह लागू करना जरूरी है।
पीठ को बताया गया कि बेड उपलब्धता का डेटा सरकारी वेबसाइट पर उपलब्ध है, लेकिन मोबाइल ऐप जो इसी जानकारी को सार्वजनिक करने के लिए बनाया गया है, गूगल प्ले स्टोर पर लॉन्च के अंतिम अनुमोदन का इंतजार कर रहा है। कोर्ट ने ऐप लॉन्च में तेजी लाने के लिए गूगल के अधिवक्ता को नोटिस जारी किया और दिल्ली हाई कोर्ट के आईटी ऑफिसर को मदद के निर्देश दिए।