देवशयनी एकादशी 2026: इस दिन इन चीजों का दान माना जाता है सबसे शुभ, भगवान विष्णु की कृपा पाने का सुनहरा अवसर
नई दिल्ली: देवशयनी एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित सबसे महत्वपूर्ण एकादशियों में से एक मानी जाती है। यह पर्व हर वर्ष आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाया जाता है। इस वर्ष देवशयनी एकादशी 25 जुलाई को मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं और अगले चार माह तक चातुर्मास का आरंभ होता है। इस दौरान पूजा-पाठ, भजन-कीर्तन, जप-तप और दान-पुण्य का विशेष महत्व माना गया है।
देवशयनी एकादशी पर अन्न दान का विशेष महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवशयनी एकादशी पर अन्न का दान अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। इस दिन जरूरतमंदों, गरीबों और ब्राह्मणों को भोजन कराना शुभ माना जाता है। गेहूं, चावल, दाल, फल और अन्य खाद्य सामग्री का दान करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होने की मान्यता है।
जरूरतमंदों को वस्त्र दान करना भी शुभ
इस पावन अवसर पर नए और स्वच्छ वस्त्रों का दान भी शुभ फलदायी माना गया है। मान्यता है कि जरूरतमंद लोगों को वस्त्र दान करने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और जीवन में सुख-समृद्धि बढ़ती है।
जल दान से मिलता है विशेष पुण्य
देवशयनी एकादशी के दिन जल और जल से जुड़ी उपयोगी वस्तुओं का दान भी महत्वपूर्ण माना गया है। पानी का घड़ा, शरबत या अन्य पेय पदार्थों का दान करना पुण्यकारी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जल दान करने से विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है।
पीले रंग की वस्तुओं का दान करें
भगवान विष्णु को पीला रंग प्रिय माना जाता है। ऐसे में इस दिन पीला चंदन, केसर, पीले फूल और पीले वस्त्रों का दान करना शुभ माना गया है। इसके साथ ही जरूरतमंद लोगों को जूते-चप्पल दान करने की भी मान्यता है।
मौसमी फल और सेवा कार्य भी माने जाते हैं पुण्यकारी
देवशयनी एकादशी पर आम, तरबूज जैसे मौसमी फलों का दान भी शुभ माना जाता है। इसके अलावा गाय की सेवा, जरूरतमंदों की सहायता और धार्मिक कार्यों में सहयोग करना भी इस दिन विशेष फलदायी माना गया है।
क्या है देवशयनी एकादशी का धार्मिक महत्व?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवशयनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु चार महीने के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं और देवउठनी एकादशी पर जागते हैं। चातुर्मास का यह समय भक्ति, साधना, आत्मचिंतन और आध्यात्मिक साधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इसी अवधि में शुभ कार्यों की बजाय पूजा, व्रत, दान और धर्म-कर्म को अधिक महत्व दिया जाता है।