कांग्रेस से बढ़ी दूरी! लोकसभा में अलग बैठने की मांग पर अड़ीं कनिमोझी, डीएमके के पत्र से सियासी हलकों में हलचल
देश की राजनीति में एक बड़ा संकेत देते हुए द्रविड़ मुनेत्र कड़गम यानी डीएमके की वरिष्ठ नेता और सांसद कनिमोझी ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर पार्टी सांसदों के लिए अलग बैठने की व्यवस्था करने की मांग की है। कनिमोझी के इस कदम ने राष्ट्रीय राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है और इसे डीएमके तथा कांग्रेस के बीच बढ़ती दूरी के तौर पर देखा जा रहा है।
कनिमोझी ने अपने पत्र में साफ तौर पर कहा है कि बदलते राजनीतिक हालात और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के साथ गठबंधन समाप्त होने के बाद सदन में डीएमके सांसदों का कांग्रेस सांसदों के साथ बैठना अब उचित नहीं होगा। उन्होंने लोकसभा में डीएमके सांसदों की बैठने की व्यवस्था में तत्काल बदलाव करने का अनुरोध किया है।
लोकसभा अध्यक्ष को लिखे पत्र में क्या कहा गया?
डीएमके सांसद कनिमोझी ने पत्र में लिखा, “मैं लोकसभा में डीएमके सांसदों की बैठने की व्यवस्था में उचित बदलाव का विनम्र अनुरोध करती हूं। बदलते राजनीतिक हालात और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के साथ हमारे गठबंधन के समाप्त होने के मद्देनजर, सदन में हमारे सदस्यों का उनके साथ वर्तमान में बैठना उचित नहीं होगा।”
इस पत्र के सामने आने के बाद सियासी गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। माना जा रहा है कि डीएमके अब कांग्रेस से सार्वजनिक तौर पर दूरी बनाने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है।
इंडिया गठबंधन पर भी उठे सवाल
कनिमोझी के इस पत्र को सिर्फ बैठने की व्यवस्था तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि डीएमके का यह कदम इंडिया गठबंधन से दूरी बनाने की दिशा में भी अहम संकेत दे सकता है।
हालांकि, अभी तक डीएमके या कांग्रेस की ओर से गठबंधन को लेकर कोई औपचारिक राजनीतिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन संसद के भीतर अलग बैठने की मांग ने दोनों दलों के रिश्तों में आई तल्खी को सार्वजनिक कर दिया है।
राजनीतिक गलियारों में तेज हुई अटकलें
डीएमके लंबे समय से कांग्रेस की अहम सहयोगी मानी जाती रही है, लेकिन हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों के बाद दोनों दलों के बीच मतभेदों की खबरें लगातार सामने आ रही थीं। अब कनिमोझी के पत्र ने इन अटकलों को और मजबूती दे दी है।
संसद के भीतर सीटिंग अरेंजमेंट को लेकर उठाया गया यह मुद्दा आने वाले दिनों में विपक्षी एकजुटता की राजनीति पर भी असर डाल सकता है। ऐसे में अब सभी की नजर डीएमके और कांग्रेस की अगली राजनीतिक रणनीति पर टिकी हुई है।