‘शौक के लिए आदेश नहीं देते’, टालमटोल वाले हलफनामे पर हाईकोर्ट सख्त, अधिकारी पर 25 हजार का जुर्माना

0 20

लखनऊ: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने राज्य सरकार के अधिकारियों की ओर से दाखिल किए जा रहे टालमटोल और खानापूर्ति वाले जवाबी हलफनामों पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि वह केवल अपने शौक के लिए या राज्य सरकार के अधिकारियों द्वारा नजरअंदाज किए जाने के लिए आदेश पारित नहीं करती। कोर्ट ने एक मामले में जवाबी हलफनामा दाखिल करने वाले अधिकारी पर 25 हजार रुपये का हर्जाना लगाया है और उसे 10 सितंबर को अदालत के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया है।

अधिकारी के रवैये पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी

न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने महेंद्र प्रताप सिंह की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। मामले में निदेशक, पंचायती राज समेत जिला प्रशासन, बहराइच की ओर से जवाबी हलफनामा दाखिल किया गया था। कोर्ट ने इसे टालमटोल वाला और खानापूर्ति से भरा माना।

अदालत ने कहा कि यह कोई पहला मामला नहीं है। कई मामलों में यह देखने को मिला है कि न्यायालय की ओर से पूछे गए सवालों का जवाब हलफनामे में नहीं दिया जाता और जो हलफनामा दाखिल किया जाता है, वह भी टालमटोल वाला होता है।

प्रमुख सचिव विधि को अधिकारियों के रवैये पर गौर करने का निर्देश

हाईकोर्ट ने अधिकारियों के इस रवैये को गंभीरता से लेते हुए प्रमुख सचिव विधि को भी मामले पर गौर करने का निर्देश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि उसके आदेशों का अनुपालन और न्यायालय की ओर से पूछे गए सवालों का स्पष्ट जवाब देना अधिकारियों की जिम्मेदारी है।

टिकट नहीं मिलने पर मुआवजा खारिज नहीं किया जा सकता

लखनऊ बेंच ने एक अन्य मामले में रेलवे से जुड़े मुआवजे को लेकर महत्वपूर्ण आदेश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मृत यात्री के पास से रेलवे टिकट बरामद नहीं होना उसके आश्रितों को मुआवजा देने से इनकार करने का आधार नहीं बन सकता। अदालत ने वर्ष 2011 में चलती ट्रेन से गिरकर हुई एक व्यक्ति की मौत के मामले में उसकी विधवा को आठ लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है।

यह फैसला न्यायमूर्ति सैयद कमर हसन रिजवी ने मृतक की पत्नी की अपील स्वीकार करते हुए सुनाया। अदालत ने रेलवे दावा अधिकरण के वर्ष 2017 के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें मृतक शिव नारायण सिंह की पत्नी लाली के मुआवजे के दावे को खारिज कर दिया गया था।

चलती ट्रेन से गिरकर हुई थी मौत

शिव नारायण सिंह ने 21 नवंबर 2011 को इटावा से दिल्ली जाने के लिए लाल किला एक्सप्रेस से यात्रा शुरू की थी। सराय भूपत रेलवे स्टेशन के पास चलती ट्रेन से गिरने के कारण उनकी मौत हो गई थी।

अदालत ने कहा कि मृतक के आश्रित पर यह साबित करने का प्रारंभिक दायित्व जरूर है कि वह वास्तविक यात्री था, लेकिन केवल उसके पास से टिकट बरामद नहीं होने के आधार पर मुआवजे का दावा स्वतः खारिज नहीं किया जा सकता।

 

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया Vnation के Facebook पेज को LikeTwitter पर Follow करना न भूलें...
Leave A Reply

Your email address will not be published.