‘डॉ. अंबेडकर मूर्ति विकास योजना’ को मंजूरी, हर विधानसभा को 1 करोड़; प्रतिमाओं पर छत्र और स्मारकों का होगा व्यापक विकास

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उत्तर प्रदेश में महापुरुषों के सम्मान और स्मारकों के विकास को लेकर योगी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। राज्य सरकार ने ‘डॉ. अंबेडकर मूर्ति विकास योजना’ को मंजूरी देते हुए प्रदेश की सभी विधानसभाओं में विशेष कार्यों के लिए बजट आवंटित करने का ऐलान किया है। इस योजना के तहत हर विधानसभा क्षेत्र में 1 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे, जबकि कुल 403 करोड़ रुपये की लागत से व्यापक विकास कार्य कराए जाएंगे।

प्रतिमाओं पर छत्र और बाउंड्री वॉल का निर्माण
सरकार के फैसले के मुताबिक, प्रदेश में जहां-जहां डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमाएं स्थापित हैं, वहां उनके ऊपर छत्र लगाया जाएगा। इसके साथ ही संबंधित स्थलों पर बाउंड्री वॉल का निर्माण और सौंदर्यीकरण भी कराया जाएगा। योजना के तहत प्रत्येक विधानसभा में करीब 10 स्मारकों का विकास किया जाएगा, जिससे इन स्थलों को व्यवस्थित और आकर्षक बनाया जा सके।

अन्य महापुरुषों के स्मारकों का भी होगा विकास
यह योजना केवल डॉ. अंबेडकर तक सीमित नहीं है। इसके दायरे में संत रविदास, कबीर, ज्योतिबा फुले और महर्षि वाल्मीकि जैसे महान संतों और समाज सुधारकों के स्मारकों को भी शामिल किया गया है। सरकार का उद्देश्य इन महापुरुषों से जुड़े स्थलों का संरक्षण और विकास करना है।

सीएम योगी पहले ही कर चुके थे घोषणा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इससे पहले एक सार्वजनिक सभा में इस योजना की घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि प्रदेश में जहां भी बाबा साहेब की प्रतिमा होगी, वहां छत्र लगाने और आसपास के पार्कों की बाउंड्री वॉल व सौंदर्यीकरण का कार्य सरकार कराएगी। अब इस घोषणा को औपचारिक मंजूरी मिल गई है।

दलित वोट बैंक पर सियासी नजर
राजनीतिक नजरिए से भी इस फैसले को अहम माना जा रहा है। उत्तर प्रदेश में करीब 22 प्रतिशत दलित मतदाता हैं और 86 आरक्षित सीटों में से 84 सीटें दलित वर्ग के लिए आरक्षित हैं। इसके अलावा लगभग 150 विधानसभा सीटों पर दलित मतदाता जीत-हार में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सभी दल इस वर्ग को साधने की कोशिश में जुटे हैं।

बदलता सियासी समीकरण
राज्य की राजनीति में लंबे समय तक प्रभाव रखने वाली मायावती के नेतृत्व वाली बसपा को पिछले कुछ चुनावों में लगातार झटका लगा है। 2012, 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में पार्टी को हार का सामना करना पड़ा, जबकि वर्तमान में विधानसभा में बसपा का सिर्फ एक विधायक है और लोकसभा में पार्टी का कोई प्रतिनिधित्व नहीं है।

सभी दलों की सक्रियता बढ़ी
दलित मतदाताओं को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। बसपा, समाजवादी पार्टी और कांग्रेस भी अपने-अपने स्तर पर सक्रिय हैं। अंबेडकर जयंती के मौके पर बड़े कार्यक्रमों की तैयारी की जा रही है। वहीं, कांग्रेस की ओर से कांशीराम को भारत रत्न देने की मांग भी उठाई गई है।

सरकार का दावा- सम्मान के लिए योजना
वहीं, सरकार का कहना है कि ‘डॉ. अंबेडकर मूर्ति विकास योजना’ पूरी तरह महापुरुषों के सम्मान और उनके विचारों के प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से लाई गई है। सरकार के अनुसार, प्रत्येक प्रतिमा पर करीब 10 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे और इसका उद्देश्य किसी भी प्रकार की राजनीतिक लाभ प्राप्ति नहीं है।

 

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