इराक के एरबिल में धमाकों से मची दहशत, अमेरिकी कॉन्सुलेट के पास भी विस्फोट, ईरानी ड्रोन हमले की आशंका

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एरबिल: उत्तरी इराक के एरबिल शहर में मंगलवार सुबह सिलसिलेवार धमाकों से दहशत फैल गई। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, पूरे शहर में कम से कम सात विस्फोटों की आवाज सुनी गई, जिनमें अमेरिकी कॉन्सुलेट के आसपास का इलाका भी शामिल है। शुरुआती रिपोर्टों में इन हमलों के पीछे ईरानी ड्रोन होने की आशंका जताई गई है।

कई इलाकों को बनाया गया निशाना

पुलिस सूत्रों के अनुसार, कम से कम चार संदिग्ध ईरानी ड्रोन ने एरबिल के उत्तर-पूर्व में स्थित खलीफान और सोरान क्षेत्रों में कई स्थानों को निशाना बनाया। हमलों के बाद प्रभावित इलाकों में भीषण आग लग गई। अधिकारियों ने बताया कि दो ड्रोन अपने लक्ष्य के पास ही दुर्घटनाग्रस्त भी हो गए।

अमेरिकी कॉन्सुलेट के आसपास भी सुनाई दिए धमाके

स्थानीय मीडिया के मुताबिक, एरबिल के विभिन्न हिस्सों में कम से कम सात धमाकों की आवाज सुनी गई। इनमें अमेरिकी कॉन्सुलेट के आसपास का क्षेत्र भी शामिल बताया गया है। घटनाओं के बाद पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई।

आसमान में दिखे अमेरिकी लड़ाकू विमान और ड्रोन

पुलिस सूत्रों के हवाले से बताया गया कि संभावित ड्रोन हमलों के बाद एरबिल के ऊपर दस से अधिक अमेरिकी लड़ाकू विमान और निगरानी ड्रोन उड़ान भरते देखे गए। सुरक्षा एजेंसियां पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

अल अनबर और सुलेमानिया से भी आईं खबरें

रिपोर्टों के अनुसार, अल अनबर प्रांत में एक अमेरिकी ड्रोन के नष्ट होने की जानकारी सामने आई है। वहीं, स्थानीय मीडिया ने हदीथा बांध के निकट एक अमेरिकी ड्रोन के दुर्घटनाग्रस्त होने की तस्वीरें भी जारी की हैं।

इसके अलावा सुलेमानिया स्थित खोर मोर गैस फील्ड पर भी हमले की खबर सामने आई है। इन घटनाओं के बाद उत्तरी और पश्चिमी इराक में सैन्य गतिविधियां तेज हो गई हैं।

ईरान को लेकर ट्रंप पहले ही दे चुके हैं चेतावनी

यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि यदि ईरान के साथ चल रही कूटनीतिक वार्ता सफल नहीं होती है तो अमेरिका दोबारा कड़ी सैन्य कार्रवाई करने के लिए तैयार है।

हालांकि, उन्होंने यह भी संकेत दिया कि मध्यस्थ देशों के अनुरोध पर प्रस्तावित सैन्य कार्रवाई को फिलहाल रोक दिया गया है ताकि बातचीत को एक और अवसर दिया जा सके। वर्तमान वार्ता का उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और ईरान के साथ नए परमाणु समझौते की दिशा में प्रगति करना बताया जा रहा है।

कई देश निभा रहे हैं मध्यस्थ की भूमिका

रिपोर्टों के अनुसार, ईरान और ओमान के नेतृत्व में चल रही इस कूटनीतिक प्रक्रिया में कतर, पाकिस्तान, मिस्र तथा अमेरिका की ओर से विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और वरिष्ठ सलाहकार जेरेड कुशनर भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

ट्रंप ने कहा कि अमेरिका फिलहाल कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता दे रहा है, लेकिन यदि बातचीत बेनतीजा रहती है तो सैन्य विकल्प भी खुला रहेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस प्रक्रिया को अनिश्चितकाल तक जारी नहीं रखा जाएगा और जल्द परिणाम की अपेक्षा है।

 

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