नई दिल्ली। भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर कश्मीर (Kashmir) से लेकर हिमाचल प्रदेश तक के सेब किसानों में चिंता बढ़ गई है। किसानों को डर है कि अगर अमेरिकी सेब (American Apple) सस्ते दाम पर भारतीय बाजार में आने लगे, तो स्थानीय सेब की मांग और कीमत दोनों गिर सकती हैं। इस डील के तहत कई देशों से आने वाले सेब पर आयात शुल्क कम किया जा रहा है। पहले ज्यादा कीमत होने के कारण विदेशी सेब कम मात्रा में आते थे, लेकिन अब ड्यूटी कम होने से आयात बढ़ने का डर है।
कश्मीर की अर्थव्यवस्था में सेब उद्योग बहुत अहम है। हजारों परिवार सीधे या परोक्ष रूप से इससे जुड़े हैं। ऐसे में अगर विदेशी सेब ज्यादा आए, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोजगार पर असर पड़ सकता है। जम्मू-कश्मीर के नेताओं ने भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि अगर बिना पर्याप्त सुरक्षा उपायों के आयात बढ़ा, तो स्थानीय बागवानी उद्योग को नुकसान हो सकता है।
हालांकि सरकार का कहना है कि अमेरिकी सेब के लिए केवल सीमित (कोटा आधारित) रियायत दी जा रही है और किसानों की सुरक्षा के लिए न्यूनतम आयात मूल्य (MIP) जैसी व्यवस्था रखी गई है, ताकि बहुत सस्ते सेब बाजार में न आ सकें। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर आयात ज्यादा बढ़ता है, तो घरेलू किसानों पर कीमत का दबाव बढ़ सकता है। वहीं कुछ लोग इसे अवसर भी मानते हैं—कहते हैं कि इससे भारतीय किसान गुणवत्ता सुधारने पर ध्यान दे सकते हैं।
घाटी के सबसे बड़े फल मार्केट, सोपोर फ्रूट मंडी के प्रेसिडेंट फैयाज अहमद मलिक ने बताया, “यह (इंडिया-US डील) हमारे लिए बहुत बुरा होगा।” वे कहते हैं, “हम US में फल उगाने वालों से मुकाबला नहीं कर सकते। उन्हें खेती के हर स्टेज पर सरकार से मदद मिलती है। उन्हें अच्छी-खासी सब्सिडी और कैश ट्रांसफर मिलते हैं, जबकि हमारे पास फसल बीमा तक नहीं है।” मलिक का कहना है कि इस ट्रेड डील का कश्मीर घाटी की इकॉनमी पर बड़ा असर पड़ेगा। वे कहते हैं, “जब हम अपने सेब बांग्लादेश भेजते हैं, तो हमें 100% से ज़्यादा टैक्स देना पड़ता है। सरकार अमेरिकन सेब पर टैक्स कैसे कम कर सकती है? इससे लोकल इंडस्ट्री और इकॉनमी बर्बाद हो जाएगी।”
बता दें कि सेब इंडस्ट्री जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था, खासकर कश्मीर घाटी की इकॉनमी का आधार और रीढ़ है। घाटी देश के कुल सेब उत्पादन का 75% पैदा करती है। आधिकारिक आंकड़ों के के मुताबिक घाटी में करीब 20 लाख मीट्रिक टन सेब पैदा होते हैं और इस सेब इंडस्ट्री की कीमत 10,000 करोड़ रुपये है। अधिकारियों का कहना है कि इस इंडस्ट्री में सीधे या अप्रत्यक्ष करीब 50 लाख लोग जुड़े हुए हैं। फिलहाल किसान संगठन सरकार से सुरक्षा उपाय बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। हिमाचल प्रदेश में सेब किसानों ने भारत-US डील में खेती की उपज, खासकर सेब को शामिल करने के खिलाफ 12 फरवरी को बंद और विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है। कश्मीर के किसान भी अब इसी तरह के प्रदर्शन का प्लान बना रहे हैं।