‘बजट 2026’ से ‘मिशन 2027’ की बुनियाद, चुनावी साल में योगी सरकार का बड़ा प्लान, इन सेक्टरों पर होगा सबसे ज्यादा खर्च

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लखनऊ। विधानसभा चुनाव 2027 से पहले योगी सरकार अपने दसवें बजट के जरिए सियासी और विकासात्मक दोनों मोर्चों पर बड़ा दांव खेलने की तैयारी में है। चुनावी साल के इस बजट में सामाजिक योजनाओं को प्राथमिकता देने के साथ-साथ विकास और अवस्थापना से जुड़ी परियोजनाओं पर सरकारी खजाना खुलकर खर्च किया जाएगा। सरकार का फोकस युवाओं, महिलाओं, बुजुर्गों और कमजोर वर्गों को राहत देने के साथ उत्तर प्रदेश को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने पर रहेगा।

अगले वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए करीब 9 लाख करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित है, जिसमें से ढाई लाख करोड़ रुपये से अधिक राशि विकास कार्यों पर खर्च की जा सकती है। 11 फरवरी को वित्त मंत्री सुरेश खन्ना बजट सदन में पेश करेंगे, जिसके बाद आवंटनों की तस्वीर साफ होगी, लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और वित्त मंत्री के हालिया बयानों से संकेत मिल चुके हैं कि चुनावी वर्ष में खर्च को लेकर सरकार कोई कंजूसी नहीं बरतेगी।

सामाजिक योजनाओं से साधने की तैयारी

सूत्रों के मुताबिक 2022 विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा के लोक कल्याण संकल्प पत्र में किए गए शेष वादों को इस बजट के जरिए पूरा करने की कोशिश होगी। वृद्धावस्था, विधवा, निराश्रित महिला और दिव्यांग पेंशन को 1000 रुपये से बढ़ाकर 1500 रुपये प्रतिमाह करने की घोषणा संभव है। 60 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं के लिए सार्वजनिक परिवहन को मुफ्त करने का संकल्प भी एजेंडे में है, हालांकि इसकी घोषणा चुनाव नजदीक आने पर की जा सकती है।

मेधावी छात्राओं को स्कूटी देने का वादा इसी वर्ष पूरा होने की संभावना है। इसके साथ ही 1,43,450 शिक्षा मित्रों के मानदेय में बढ़ोतरी का ऐलान भी बजट में हो सकता है। 2017 से 10 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय पाने वाले शिक्षा मित्रों का वेतन बढ़ाकर 17 से 20 हजार रुपये किया जा सकता है, जिसके लिए करीब 250 करोड़ रुपये का प्रावधान संभव है।

कानून व्यवस्था और पुलिस पर भारी निवेश

जीरो टॉलरेंस नीति को और मजबूत करने के लिए योगी सरकार इस बार पुलिस महकमे पर खासा मेहरबान हो सकती है। गृह विभाग को 45 हजार करोड़ रुपये से अधिक का बजट दिए जाने की संभावना है। इसमें साइबर अपराध पर नियंत्रण, पुलिस, पीएसी और फायर सर्विस के लिए वाहन खरीद, भवन निर्माण और संसाधनों के आधुनिकीकरण पर खर्च किया जाएगा।

सड़कों, बसों और हवाई संपर्क पर फोकस

प्रदेशभर में सड़क नेटवर्क को मजबूत करने के लिए लोक निर्माण विभाग को 42 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा मिलने की संभावना है। राज्य राजमार्ग, बाईपास, ग्रामीण सड़कें, लिंक रोड, सेतु और धार्मिक मार्गों के निर्माण को गति दी जाएगी। जीरो फैटेलिटी योजना के तहत सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए 1300 करोड़ रुपये दिए जा सकते हैं।

बसों और बस स्टेशनों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए 100 करोड़, ग्राम पंचायत और प्रत्येक विकास खंड में बस स्टॉप बनाने के लिए 1200 करोड़ रुपये का प्रावधान संभव है। इलेक्ट्रिक और डीजल बसों की खरीद के लिए 2000 करोड़ रुपये मिल सकते हैं। हवाई सफर को बेहतर बनाने के लिए जेवर सहित सभी हवाई पट्टियों के निर्माण पर 2000 करोड़ रुपये और अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण के लिए 500 करोड़ रुपये दिए जा सकते हैं।

शिक्षा और शहरी विकास को नई धार

बेसिक और माध्यमिक शिक्षा के लिए इस बार 2500 करोड़ रुपये अतिरिक्त दिए जाने के संकेत हैं। बेसिक शिक्षा को 81 हजार करोड़ और माध्यमिक शिक्षा को 25 हजार करोड़ रुपये मिलने की संभावना है। शेष बचे 140 विकास खंडों में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों के लिए 1000 करोड़ और जर्जर स्कूलों के सुधार के लिए 300 करोड़ रुपये दिए जा सकते हैं। माध्यमिक विद्यालयों में ड्रीम स्किल लैब क्लस्टर के लिए 500 करोड़ रुपये का प्रावधान संभव है।

शहरी अवस्थापना सुविधाओं के लिए आवास विभाग को साढ़े आठ हजार करोड़ रुपये मिल सकते हैं। मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण योजना के तहत नई टाउनशिप विकसित करने के लिए 3500 करोड़ रुपये प्रस्तावित हैं। लखनऊ, कानपुर, मेरठ और मथुरा-वृंदावन समेत विभिन्न विकास प्राधिकरणों के लिए 2500 करोड़, लखनऊ मेट्रो के लिए 500 करोड़ और मंडलीय कार्यालयों के निर्माण के लिए 80 करोड़ रुपये दिए जा सकते हैं।

क्षेत्रीय विकास, खेल और उद्योग पर खर्च

त्वरित आर्थिक विकास योजना के तहत नई बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए 2000 करोड़ रुपये दिए जा सकते हैं। पूर्वांचल के लिए करीब 1500 करोड़ और बुंदेलखंड के लिए 500 करोड़ रुपये का प्रावधान संभावित है। खेलों को बढ़ावा देने के लिए 1000 करोड़ रुपये खर्च किए जा सकते हैं।

आगरा, मीरजापुर, देवीपाटन, झांसी, मुरादाबाद, अयोध्या, बरेली और अलीगढ़ में स्पोर्ट्स कॉलेज की स्थापना के लिए लगभग 20 करोड़ रुपये दिए जा सकते हैं। मेरठ स्थित मेजर ध्यानचंद्र राज्य खेल विश्वविद्यालय में स्पोर्ट्स साइंस लैब, जिम, खेल उपकरण और पुस्तकालय के लिए 42 करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान संभव है। ग्रामीण स्टेडियम और ओपन जिम के लिए 350 करोड़ रुपये दिए जा सकते हैं।

पीएम अजय योजना के तहत अनुसूचित जाति बहुल गांवों के विकास के लिए 2000 करोड़ रुपये और औद्योगिक क्षेत्रों की अवस्थापना सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए अटल इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन के तहत 4000 करोड़ रुपये दिए जाने की संभावना है।

खर्च की रफ्तार पर उठते सवाल

हालांकि बजट घोषणाओं के बावजूद खर्च की धीमी रफ्तार सरकार के लिए चुनौती बनी हुई है। मौजूदा वित्तीय वर्ष में लोक निर्माण विभाग को 37,798 करोड़ रुपये मिले, लेकिन 10 महीनों में सिर्फ 40 प्रतिशत ही खर्च हो सका। पुलिस विभाग ने 61 प्रतिशत, राजस्व 45 प्रतिशत, आवास 37 प्रतिशत, प्राथमिक शिक्षा 53 प्रतिशत, समाज कल्याण 58 प्रतिशत, वन 46 प्रतिशत, परिवहन 34 प्रतिशत, अवस्थापना 21 प्रतिशत और खेल विभाग ने महज 33 प्रतिशत बजट ही खर्च किया।

पिछले बजट में घोषित रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना, नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर, कुकरैल नाइट सफारी, मंडलीय कार्यालयों का निर्माण, मां अन्नपूर्णा कैंटीन और हर परिवार को रोजगार देने जैसे कई ऐलान अब तक पूरी तरह धरातल पर नहीं उतर सके हैं। ऐसे में ‘बजट 2026’ से ‘मिशन 2027’ की तैयारी में जुटी योगी सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती घोषणाओं को जमीन पर उतारने की रहेगी।

 

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