नई दिल्ली। भारत के पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की अप्रकाशित आत्मकथा ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ ने संसद में हलचल मचा दी। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इसके अंशों का हवाला देकर प्रधानमंत्री और सरकार की चीन नीति पर सवाल उठाने की कोशिश की, लेकिन रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि पुस्तक अभी प्रकाशित नहीं हुई है, इसलिए इसका हवाला नहीं दिया जा सकता।
किताब लिखने की कहानी
जनरल नरवणे ने बताया कि शुरू में उनका आत्मकथा लिखने का कोई इरादा नहीं था। अप्रैल 2025 में उन्होंने याद किया कि पेंगुइन पब्लिशर्स ने दिवंगत जनरल बिपिन रावत की किताब प्रकाशित की थी। मार्च 2023 में विमोचन समारोह में मजाक में उन्होंने पूछा कि उनकी किताब क्यों नहीं प्रकाशित की जा रही। इस बातचीत से प्रेरणा मिली और उन्होंने किताब लिखना शुरू किया। नरवणे ने कहा कि पुस्तक लिखकर उन्हें संतुष्टि मिली, लेकिन प्रकाशन में देरी अब प्रकाशक और रक्षा मंत्रालय के बीच मामला बनी हुई है।
पूर्व सेना प्रमुख ने स्वीकार किया कि किताब की समीक्षा आवश्यक है ताकि राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति पर कोई नकारात्मक असर न पड़े। उन्होंने कहा कि समीक्षा में समय लगना समझदारी है, लेकिन 15 महीने से अधिक लंबा इंतजार उचित नहीं।
अप्रकाशित पुस्तक चर्चा में तब आई जब राहुल गांधी ने लोकसभा में इसके अंश पेश किए। उन्होंने दावा किया कि किताब में बताया गया है कि 2020 में चीन के साथ सीमा तनाव के दौरान प्रधानमंत्री और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने लंबे समय तक प्रतिक्रिया नहीं दी।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि पुस्तक की सामग्री तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है और इसका हवाला देना संसद नियम और राष्ट्रीय हित के खिलाफ है। स्पीकर ओम बिरला ने भी इसे स्वीकार किया।
राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री को यह किताब देखने की जरूरत है और उन्होंने इसे सदन को दिखाने का प्रयास किया।
‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ 2023 से प्रकाशन के लिए लंबित है। पेंगुइन ने इसे अप्रैल 2024 में प्रकाशित करने की योजना बनाई थी, लेकिन अभी तक आम जनता के लिए उपलब्ध नहीं है। अमेजन और फ्लिपकार्ट पर इसकी लिस्टिंग मौजूद है, जिसमें 448 पृष्ठ बताए गए हैं।
बता दें कि नरवणे की दूसरी किताब, ‘द कैंटोनमेंट कॉन्स्पिरेसी’, मार्च 2025 में प्रकाशित हो चुकी है।