उत्तर प्रदेश का आर्थिक इंजन बना गौतम बुद्ध नगर, 2.6 लाख करोड़ की अर्थव्यवस्था और 10 लाख पार करती आय ने बदली तस्वीर

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश का गौतम बुद्ध नगर जिला आज सिर्फ एनसीआर का हिस्सा नहीं, बल्कि पूरे राज्य की अर्थव्यवस्था का सबसे मजबूत स्तंभ बनकर उभरा है। जिसे कभी दिल्ली का विस्तार भर माना जाता था, वही जिला अब उत्तर प्रदेश का ‘आर्थिक पावरहाउस’ कहलाने लगा है। साल 2017 के बाद से यहां विकास की रफ्तार ने ऐसी गति पकड़ी कि बुनियादी ढांचे से लेकर उद्योग, रोजगार और कानून-व्यवस्था तक हर मोर्चे पर तस्वीर बदलती चली गई।

औद्योगिक गतिविधियों ने फिर पकड़ी रफ्तार
नोएडा की स्थापना का उद्देश्य इसे एक बड़े औद्योगिक केंद्र के रूप में विकसित करना था, लेकिन एक दौर में यह लक्ष्य कमजोर पड़ता दिखा। बीते सात-आठ वर्षों में प्रशासनिक प्राथमिकताओं में बदलाव के साथ उद्योगों को नया जीवन मिला। सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए दैनिक जागरण के नोएडा ब्यूरो चीफ धर्मेंद्र चंदेल बताते हैं कि अकेले ग्रेटर नोएडा में 2017 के बाद करीब 6,000 नई औद्योगिक इकाइयां शुरू हुई हैं। इससे जिले का औद्योगिक और निवेश माहौल पूरी तरह बदल गया है।

2.6 लाख करोड़ से ज्यादा की अर्थव्यवस्था
आर्थिक मोर्चे पर गौतम बुद्ध नगर ने राज्य में नई मिसाल कायम की है। फिलहाल यह जिला उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था में 2.6 लाख करोड़ रुपये से अधिक का योगदान दे रहा है। यहां की प्रति व्यक्ति आय 10 लाख रुपये के आंकड़े को पार कर चुकी है, जो प्रदेश के अन्य जिलों से इसे बिल्कुल अलग पायदान पर खड़ा करती है। डेटा सेंटर्स, आईटी पार्क, स्टार्टअप्स और हाईटेक इंफ्रास्ट्रक्चर इस विकास को जमीन पर महसूस कराते हैं।

रोजगार का सबसे बड़ा हब बनता जिला
गौतम बुद्ध नगर अब रोजगार के लिहाज से भी राज्य का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है। बीते कुछ वर्षों में यहां 10 लाख से अधिक नई नौकरियों का सृजन हुआ है, जिसमें आईटी और आईटीईएस सेक्टर की अहम भूमिका रही है। दैनिक जागरण के दिल्ली-एनसीआर संपादक महेश शुक्ला के अनुसार राज्य सरकार की ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ योजना ने स्थानीय उद्योगों को नई मजबूती दी है। आज यह जिला रेडीमेड गारमेंट्स का राष्ट्रीय केंद्र बन चुका है, जहां करीब 2,500 गारमेंट इकाइयां सक्रिय हैं और हजारों परिवारों की रोजी-रोटी इससे जुड़ी हुई है।

कानून-व्यवस्था में बड़ा बदलाव
तेजी से हुए विकास के साथ कानून-व्यवस्था में सुधार भी जिले की बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। 2017 से पहले जहां असुरक्षा का माहौल था, वहीं अब हालात पूरी तरह बदले नजर आते हैं। पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली लागू होने के बाद सुरक्षा व्यवस्था अधिक सशक्त हुई है। स्थानीय लोगों, खासकर महिलाओं का कहना है कि रात में बढ़ी पुलिस गश्त और बेहतर स्ट्रीट लाइटिंग के चलते वे पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित महसूस करती हैं।

भविष्य की ओर तेज कदम
आने वाले वर्षों में जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट और माइक्रोसॉफ्ट, टीसीएस, सैमसंग जैसी वैश्विक कंपनियों का निवेश गौतम बुद्ध नगर को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की ओर बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर विकास की यही रफ्तार बनी रही, तो 2047 तक यह जिला उत्तर भारत का सबसे बड़ा मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी हब बन सकता है और ‘विकसित भारत’ के सपने का एक मजबूत मॉडल साबित होगा।

 

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