गाजियाबाद में स्वास्थ्य सुविधाओं को नई मजबूती मिलने जा रही है। उत्तर प्रदेश सरकार के बजट में प्रत्येक जिले में इमरजेंसी ट्रामा सेंटर खोलने और कैशलेस प्रसव की व्यवस्था लागू करने की घोषणा के बाद जिले की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की उम्मीद बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन प्रावधानों से गंभीर मरीजों और गर्भवती महिलाओं को सीधा लाभ मिलेगा।
जिले के संयुक्त अस्पताल में पहले से ट्रामा सेंटर मौजूद है, लेकिन पर्याप्त सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। वहीं जिला एमएमजी अस्पताल में ट्रामा सेंटर की सख्त जरूरत महसूस की जा रही है, क्योंकि सड़क हादसों और अन्य गंभीर मामलों में घायल मरीज सबसे अधिक इसी अस्पताल में पहुंचते हैं।
कार्यवाहक सीएमएस डॉ. चरन सिंह का कहना है कि सरकार की ओर से ट्रामा सेंटर खोलने की घोषणा ने बेहतर उपचार की उम्मीद जगाई है। उन्होंने कहा कि जिला महिला अस्पताल में कैशलेस प्रसव की सुविधा लागू होने से जच्चा और बच्चा दोनों की देखभाल और अधिक प्रभावी तरीके से हो सकेगी।
जिला अस्पतालों की क्षमता बढ़ाने पर जोर
बजट में जिला अस्पतालों की क्षमता विस्तार और सभी जिलों में इमरजेंसी ट्रामा सेंटर स्थापित करने का प्रावधान किया गया है। साथ ही मेडिकल कॉलेज खोलने के निर्णय से प्रदेश का स्वास्थ्य ढांचा मजबूत होगा। इससे डॉक्टर, नर्स, पैरामेडिकल स्टाफ और सहायक स्वास्थ्य कर्मियों के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
वर्तमान में प्रदेश में 105 जिला स्तरीय अस्पताल संचालित हैं, जिनमें 40 जिला अस्पताल, 27 जिला महिला अस्पताल और 28 संयुक्त चिकित्सालय शामिल हैं। जिला अस्पतालों की क्षमता बढ़ने से मरीजों को बड़े चिकित्सा संस्थानों की ओर रुख नहीं करना पड़ेगा और उन्हें स्थानीय स्तर पर ही बेहतर इलाज मिल सकेगा। प्रदेश सरकार सभी जिला अस्पतालों में सीटी स्कैन और डायलिसिस जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रही है।
एमआरआई और भर्ती क्षमता बढ़ाने की तैयारी
केंद्रीय सहायता मिलने पर एमआरआई जांच की सुविधा और मरीजों को भर्ती करने की क्षमता में वृद्धि की योजना है। सभी जिलों में इमरजेंसी ट्रामा सेंटर स्थापित करने की पहल से सड़क दुर्घटना में घायल लोगों को गोल्डन आवर में उपचार उपलब्ध कराने की व्यवस्था और सुदृढ़ होगी। वर्तमान में स्वास्थ्य विभाग की ओर से विभिन्न जिलों में लेवल-3 के 34 ट्रामा सेंटर संचालित किए जा रहे हैं।
प्रदेश सरकार सड़क दुर्घटना पीड़ितों को समयबद्ध इलाज उपलब्ध कराने के लिए स्टेट ट्रामा केयर पॉलिसी तैयार कर रही है। पॉलिसी लागू होने और केंद्रीय सहयोग मिलने के बाद सभी जिलों में इमरजेंसी ट्रामा सेंटर का नेटवर्क और मजबूत होने की संभावना है, जिससे गंभीर मरीजों को तत्काल उपचार मिल सकेगा।
बजट की प्रमुख घोषणाएं और जिले को लाभ
जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम प्रदेश के सभी जनपदों में लागू है। इस योजना का उद्देश्य गर्भवती महिलाओं को गारंटी के साथ कैशलेस डिलीवरी सेवा उपलब्ध कराना है।
आयुष्मान भारत–मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना के अंतर्गत 49.22 लाख लाभार्थी परिवार पंजीकृत हैं। योजना के लिए 500 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है। गाजियाबाद जिले में ही पांच लाख से अधिक लाभार्थी हैं, जिन्हें इसका सीधा लाभ मिलेगा।
प्रदेश के 75 जनपदों में राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है।
राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के लिए 8,641 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित की गई है, जबकि आयुष्मान भारत नेशनल हेल्थ प्रोटेक्शन मिशन के लिए 2,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि बजट में की गई ये घोषणाएं जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू होती हैं तो गाजियाबाद समेत पूरे प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की तस्वीर बदल सकती है।