अमेरिका में 5 करोड़ डॉलर का हेल्थकेयर घोटाला उजागर: FBI की बड़ी कार्रवाई, 8 आरोपी गिरफ्तार

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अमेरिका में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ा एक बड़ा घोटाला सामने आया है, जिसने सिस्टम की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल के दौरान उजागर हुए इस मामले में संघीय जांच एजेंसी एफबीआई ने कार्रवाई करते हुए 8 लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि इन लोगों ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणाली में 5 करोड़ डॉलर से ज्यादा की धोखाधड़ी की।

यह कार्रवाई कैलिफोर्निया में की गई, जहां फर्जी स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर लंबे समय से घोटाला चल रहा था।

फर्जी हॉस्पिस सेंटर के जरिए करोड़ों की ठगी

एफबीआई के मुताबिक, आरोपी कथित रूप से फर्जी “हॉस्पिस केयर” केंद्र चला रहे थे। ये केंद्र कागजों पर मरीजों की देखभाल दिखाते थे, जबकि हकीकत में कोई वास्तविक सेवा नहीं दी जा रही थी।

इन फर्जी केंद्रों के जरिए आरोपी सरकारी स्वास्थ्य योजना मेडिकेयर से लगातार भुगतान हासिल कर रहे थे। जांच में सामने आया कि मरीजों के नाम पर फर्जी बिल बनाकर करोड़ों डॉलर की ठगी को अंजाम दिया गया।

ट्रंप सरकार की कमेटी के बाद तेज हुई जांच

इस पूरे मामले में कार्रवाई तब तेज हुई जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक विशेष कमेटी का गठन किया। इस कमेटी का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस कर रहे थे।

अमेरिका के कार्यवाहक अटॉर्नी बिल एसेली के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों में तीन नर्स, एक काइरोप्रैक्टर और एक मनोवैज्ञानिक शामिल हैं। इन पर आरोप है कि इन्होंने ऐसे लोगों को भी हॉस्पिस केयर का मरीज दिखाया, जो गंभीर रूप से बीमार नहीं थे, और उनके नाम पर फर्जी दावे किए।

असामान्य आंकड़ों से खुला राज

इस घोटाले का खुलासा तब हुआ जब जांच एजेंसियों को इन केंद्रों में मरीजों के जीवित रहने की दर संदिग्ध लगी। आमतौर पर हॉस्पिस केयर में यह दर करीब 17 प्रतिशत होती है, लेकिन इन केंद्रों में यह पांच गुना अधिक पाई गई।

यही असामान्यता जांच का कारण बनी और पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश हो गया। गिरफ्तार आरोपियों में ग्लैडविन और एमेलो गिल नाम का दंपति भी शामिल है, जो एक हॉस्पिस कंपनी का संचालन कर रहे थे।

एफबीआई के मुताबिक, दक्षिणी कैलिफोर्निया क्षेत्र स्वास्थ्य सेवा धोखाधड़ी के मामलों के लिहाज से हाई-रिस्क जोन माना जाता है। एजेंसी ने चेतावनी दी है कि इस तरह की धोखाधड़ी से हर साल अरबों डॉलर का नुकसान होता है, जिसका सीधा बोझ करदाताओं पर पड़ता है।

 

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